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ईमेल स्पूफिंग से करोड़ों की ठगी करने मे नाइजीरियन लोग शामिल

जानिए ईमेल स्पूफिंग क्या है साइबर अपराधी ईमेल स्पूफिंग का इस्तेमाल करते हैं। यह आपकी या फिर किसी भी विभाग की ईमेल आइडी या वेबसाइट से एकदम मिलती जुलती आइडी बना लेते हैं। इसे देखकर लगता है कि वह वास्तविक आइडी है। इसके बाद उससे वह आपको लिंक ईमेल करते हैं। देखने में वह विभाग का मेल लगता है और जैसे ही लोग उसे क्लिक करते हैं उनके कंप्यूटर में वायरस चला जाता है और उसके बाद सिस्टम से जारी जानकारी हैकर मिलने लगती है।

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लखनऊ

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Anil Ankur

Feb 28, 2019

cyber crime

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लखनऊ. साइबर क्राइम सेल की टीम ने ईमेल स्पूफिंग के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले नाइजीरियन गिरोह का राजफाश किया है। गिरोह का सरगना नाइजीरिया का युवक है, जिसके साथ छह अन्य शामिल थे। साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्र के मुताबिक सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों ने ईमेल स्पूफिंग के माध्यम से राजकीय निर्माण निगम के एमडी के नाम का दुरुपयोग कर विभाग के खाते से साढ़े नौ लाख रुपये स्थानांतरित करवाए थे।


हजरतगंज पुलिस ने बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना मूलरूप से ओपोवो रोड इमो स्टेट नाइजीरिया निवासी आस्कर यहां वार्ड नंबर तीन मेहरौली नई दिल्ली में रहता था। आरोपित के गिरोह में बारून औरंगाबाद बिहार निवासी मोहम्मद नौशाद, सिधारीपुर दरियाचक तिवारीपुर गोरखपुर निवासी रिजवानउल्लाह राईन, ठठवारी, मेहंदावल संतकबीर नगर निवासी प्रवीन जायसवाल, घोसीपुर तिवारीपुर गोरखपुर निवासी गयासुद्दीन खान व परवेज तथा राप्तीनगर शाहपुर गोरखपुर निवासी आशीष जायसवाल शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि गोरखपुर के ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स के कई खातों से अब तक एक करोड़ 31 लाख 464 रुपये स्थानांतरित किए जा चुके हैं।


इस तरह जुड़े थे नाइजीरिया से तार

साइबर सेल को पूछताछ में आरोपित आस्कर ने बताया है कि वह नाइजीरिया में बैठे अपने साथियों से ईमेल स्पूफिंग करवाकर बड़ी-बड़ी कंपनियों से लाखों रुपये स्थानांतरित करवा लेता था। आस्कर के कई नाइजीरियन साथी दिल्ली में भी सक्रिय हैं, जिनके बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।


एक मामला यह भी

उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम यूपीआरएनएन के प्रबंध निदेशक के नाम पर जालसाजों ने साढे नौ लाख रुपये हड़प लिए थे। दरअसल, छह फरवरी को विभाग वित्तीय सलाहकार विनोद प्रभाकर को एक ई-मेल मिला था, जो निगम के एमडी राजन मित्तल के नाम से था। इसमें लिखा गया था कि वह एक बैठक में हैं और एक कपंनी को उसका साढ़े नौ लाख रुपये बकाया देना है, जिसे फौरन आरटीजीएस कर दें। मेल देखकर एकाउंटेंट ने रुपये स्थानांतरित कर दिए थे। शिकायत होने के बाद जांच में पता चला था कि मेल एमडी ने नहीं भेजे थे, जिसके बाद पुलिस से शिकायत की गई थी। छानबीन में पता चला था कि रुपये गोरखपुर के श्रीबालाजी महिला गृह उद्योग के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। इसकी एफआईआर दर्ज कर साइबर सेल जांच कर रही है।

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