
मायावती का बंगला मोह-अब सीएम योगी से मिले सतीश चंद्र मिश्र
लखनऊ.मायावती अपना बंगला बचाने के लिए काफी कोशिशें कर रही हैं। मायावती किसी तरह यह चाह रही हैं कि उन्हें उसी बंगले में रहने दिया जाए। बीएसपी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने इस सिलसिले में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास खाली कराए जाने के आदेश के बाद से यूपी की सियासत में काफी हलचल है। खासकर बसपा सुप्रीमो मायावती अपना बंगला बचाने के लिए हर जतन कर रही हैं, तो वहीं कई पूर्व मुख्यमंत्री बंगला खाली करने के लिए कुछ समय मांग रहे हैं।
पहले तो मायावती ने १३ ए, माल एवेन्यू सरकारी आवास के बाहर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल का बोर्ड लगवा दिया और अब उनके काफी करीबी सतीश चंद्र मिश्र ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की है।
सतीश चंद्र मिश्र बोले- यादगार मुलाकात हुई है
शुक्रवार दोपहर को बीएसपी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने एनेक्सी भवन में सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले। सीएम से मुलाकात के बाद सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि उनकी सीएम योगी के साथ यादगार मुलाकात हुई है। वह उनसे १३ ए, माल एवेन्यू कांशीराम यादगार स्थल के सिलसिले में मिले थे। उन्होंने यह बंगला वापस न लेने के लिए सीएम को प्रत्यावेदन सौंपा है। मिश्र के साथ बीएसपी विधायक लालजी वर्मा भी मौजूद थे।
राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि 13 ए माल एवेन्यू कांशीराम की याद में बनाया गया था। उसके बाद यह बंगला मायावती को अलॉट हुआ था। 13 जनवरी 2011 को कैबिनेट में निर्णय लिया गया था कि पूरा बंगला कांशीराम यादगार स्थल के नाम से रहेगा और मायावती उसके छोटे से भाग में रहेंगी। वहीं दूसरे आदेश में कहा गया था कि मायावती के आवास छोडऩे के बाद किसी दूसरे को वह आवास अलॉट नहीं किया जाएगा।
... तो नहीं खाली करना पड़ेगा
जब मायावती सीएम थीं तो उनके बंगले के पास ही कांशीराम विश्राम स्थल हुआ करता था। बाद में इसको कथित रूप से उन्होंने अपने बंगले से जोड़ लिया। इसके पीछे कारण यह था कि उस समय कांशीराम विश्राम स्थल का मासिक किराया करीब ७२ हजार रुपए था और वहीं मायावती के बंगले का किराया ४२१२ रुपए। कथित रूप से किराये बचाने के लिए दोनों (बंगला और कांशीराम विश्राम स्थल) को एक साथ कर दिया गया। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंगले खाली करने की बात आई तो मायावती ने 13 ए, माल एवेन्यू के बाहर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल का बोर्ड लगवा दिया। माना जा रहा है कि यदि इस बंगले को कांशीराम विश्राम स्थल के नाम कर दिया जाता है तो मायावती को इसे खाली नहीं करना पड़ेगा। लेकिन उस हालत में उन्हें कांशीराम विश्राम स्थल का पूरा किराया चुकाना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना बंगला खाली करना अब काफी खल रहा है। हो भी क्यों न इन पूर्व मुख्यमंत्रियों के ये बंगले किसी पंच सितारा होटलों से कम नहीं हैं। अब उन्हें इसे खाली करना पड़ रहा है तो उनके से कई की कोशिश है कि कुछ दिन और समय ले लें और कुछ की कोशिश है कि यह बंगला किसी तरह खाली न करना पड़े।
Published on:
25 May 2018 04:23 pm
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