
लखनऊ। सहारा अस्पताल में इलाज के दौरान एक बुजुर्ग की मौत हो गई। उसे हार्ट
अटैक आने के बाद इलाज के लिए सहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज
की मौत से नाराज परिजनों ने अस्पताल
में जमकर हंगामा किया।
उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते मरीज की मौत का जि मेदार अस्पताल के डॉक्टरों को
ठहराया।
सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। उसके हस्तक्षेप से मामला शांत हो
पाया। राजधानी के आलमबाग निवासी उमेश कुमार वर्मा (51) को हार्ट अटैक आने
के बाद 16 जनवरी को सहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों
का आरोप है कि भर्ती के दिन से ही मरीज के साथ लापरवाही बरती जा रही थी।
मरीज को भर्ती होने के करीब 12 घण्टे बाद सीनियर डाक्टर ने मरीज को देखा
था। भर्ती के अगले दिन से मरीज की हालत में धीरे -धीरे सुधार दिखने लगा था।
उसके इलाज में अब तक 3 लाख रूपये का खर्च आ चुका था।
घरवालों का कहना
है कि मरीज को पेसमेकर पर रखा गया है। अस्पताल के सीनियर डॉक्टर नकुल
सिन्हा की देखरेख में मरीज का उपचार चल रहा था।
वह मंगलवार को ही
आस्ट्रेलिया के लिए टूर पर चले गये थे। उनकी अनुपस्थिति में जूनियर डॉक्टर
मरीज को देख रहे थे। आज जूनियर डॉक्टरों ने बिना सीनियर डॉक्टर से परामर्श
लिये मरीज के शरीर से पेसमेकर हटा दिया। जिसके चलते कुछ देर में ही मरीज ने
दम तोड़ दिया। मरीज की मौत की सूचना
मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गये। उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
परिजनों
की मौजूदगी में अस्पताल के कुछ डॉक्टरों से घरवालों की बात हुई। मरीज के
भतीजे सचिन ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की मौत के कारणों के
बारें में ठीक से कोई भी जानकारी नहीं दी। डॉक्टर बस एक ही बात कह रहे थे
कि मरीज का पोस्टमार्टम कराये लेकिन परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार न थे।
पुलिस ने उनसे लिखित में शिकायती पत्र ले लिया। उसके बाद परिजनों का गुस्सा
शांत हुआ और वे शव को लेकर घर वापस लौट गये। इस संदर्भ में अस्पताल
प्रशासन का कहना है कि मरीज के
इलाज में किसी भी प्रकार की कोई भी लापरवाही नहीं की गई है। उसकी हालत पहले से ही नाजुक थी। जिसके चलते आज उसकी मौत हो गई।
Published on:
20 Jan 2016 09:51 pm
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