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पाई-पाई को तरस रहा खजांची का परिवार, नोटबंदी के दौरान अखिलेश ने की थी मदद

आठ नवंबर को नोटबंदी को एक साल पूरे होने जा रहे हैं। बीजेपी इसे कालाधन विरोधी दिवस के तौर पर मनाएगी तो कांग्रेस इसे काला दिवस के तौर पर मनाएगी।

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akhilesh

लखनऊ. आठ नवंबर को नोटबंदी को एक साल पूरे होने जा रहे हैं। बीजेपी इसे कालाधन विरोधी दिवस के तौर पर मनाएगी तो कांग्रेस इसे काला दिवस के तौर पर मनाएगी। करीब एक साल पहले नोटबंदी के दौरान कई ऐसे किस्से भी हुए जिनकी काफी चर्चा रही। इन्हीं में से एक था 'खजांची' का जन्म। कानपुर देहात की रहने वाली सर्वेशा देवी ने बैंक की लंबी लाइन में एक बच्चे को जन्म दिया जिसका नाम लोगों ने खजांची रख दिया। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने भी कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसका नाम लिया। ये बच्चा उस वक्त देश भर में प्रसिद्ध हो गया लेकिन एक साल में इस परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा गिर गई।

खजांची का परिवार कानपुर देहात झींझक इलाके में रहता है। पिछले साल 2 दिसंबर को नौ महीने की गर्भवती सर्वेशा देवी पीएनबी की लंबी लाइन में रुपये निकालने के लिए खड़ी थी क्योंकि लगभग एक महीने पहले ही सरकार ने 500 और 1000 का नोट बंद किया था। सर्वेशा ने बताया उसे बैंक की लाइन में खड़े हुए पांच घंटे हो गए थे। उसने बैंक अधिकारियों से मदद मांगी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उसे वहीं दर्द होने लगा और बैंक की सीढियों में उसकी सास ने उसकी डिलीवरी करवाई। सर्वेशा ने बेटे का नाम खजानची रखा। लोग सर्वेशा को भले ही न जानते हों लेकिन उसके बेटे खजांची का नाम दुनिया में प्रसिद्ध हो गया।

अखिलेश यादव ने की थी मदद

खजांची पूरे देश में मशहूर हो गया था लेकिन अब परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से भी ज्यादा खराब है। गरीबी में पल बढ़ रहा है। उसके परिवार को एसपी सरकार ने 2 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के दिए थे। यह रुपये बच्चे की पढ़ाई में खर्च होना था लेकिन परिवार ने 75,000 रुपये दूसरे कामों में खर्च कर दिए। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में सर्वेशा ने बताया कि खजांची की चार बड़े भाई बहन हैं, उनकी शादी के लिए परिवार को रुपये चाहिए। खजांची की सबसे बड़ी बहन प्रीति दस साल की है और तीन भाईयों में से एक भाई टीबी की बीमारी से जूझ रहा है। उसका इलाज आगरा में चल रहा है।

पिता की मृत्यु हो चुकी है

सर्वेशा ने बताया कि खजांची के पिता की उसके पैदा होने से 6 महीने पहले टीबी से मौत हो चुकी थी।। उसकी मां को बचपन से पोलियो है। वह लंगड़ाकर चलती हैं इसलिए जीवन यापन के लिए नौकरी नहीं कर सकती। खजांची का परिवार सपेरे जनजाति का है। जिन बैंक के बाहर खजांची का जन्म हुआ था उस बैंक के मैनेजर सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि ब्रांच में 400 से 500 लोग काम करते हैं। बैंक की सीढ़ियों में बच्चे का जन्म होने पर अफरा-तफरी मच गई। उनकी स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल रुपये दिए गए। बाद में बैंक अधिकारी उसके घर गए थे और उसे 5000 की एफडी कपड़ों और खिलौनों के साथ दी थी।
आज खजांची के परिवार को ऐसी ही आर्थिक स्थिति की फिर से दरकार है।