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ओवैसी का प्लान यूपी चुनाव में बिगाड़ेगा का सबका गणित

अब ओवैसी भी खेलेंगे उत्तर प्रदेश चुनाव में बड़ा गेम

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Santoshi Das

Aug 12, 2016

Owaisi

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लखनऊ.यूपी चुनाव 2017 के लिए छोटे दल ऐसी तैयारी में लगे हुए हैं की बीजेपी को यूपी में आने से रोका जा सके। तैयारी ठीक वैसी ही है जैसा की बिहार चुनाव के समय देखा गया था। मगर नितीश कुमार के बिहार और अखिलेश के उत्तर प्रदेश में बड़ा फर्क है। बीजेपी उत्तर प्रदेश में लगातार अपनी पकड़ मजबूत बना रही है। इस पकड़ को कमज़ोर करने के लिए अब ओवैसी नया चाल चलने जा रहे हैं।

इस प्लानिंग के तहत यूपी के मुस्लिम दल और अन्य दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट करने की तैयारी हो रही है। दरअसल बीजेपी को यूपी में आओवैसी का लखनऊ आने का मकसद कहीं ये तो नहीं? बीजेपी के लिए बुनी जा रही साजिशने से रोकने के लिए और बिहार की तरह कांग्रेस, जदयू और अन्य छोटे दलों के सहारे यूपी इलेक्शन जीतने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत छोटे मुस्लिम दलों को लेकर बनाया गया इत्तेहाद फ्रंट पहले मुस्लिम दलों को एकजुट किया जा रहा है। इसमें आईएमआईएम के ओवैसी व इत्तेहाद-ए-मिल्लत कांफ्रेंस के अध्यक्ष बरेलवी मौलाना तौकीर रज़ा भी शामिल हो सकते हैं।

ऐसे चल रही है बीजेपी को हारने की तैयारी

ओवैसी का लखनऊ आना महज इत्तेफाक नहीं बल्कि सोची समझी तैयारी है। यूपी में बिहार मॉडल पर कांग्रेस जीते इसके लिए जनता दल यूनाइटेड की बढ़ती सक्रियता और कांग्रेस के गुप्त एजेंडे पर काम चल रहा है। इन पार्टियों में अंदर ही अंदर कई प्लानिंग बन रही है। एक तरफ मुस्लिम नेतृत्व की दावेदार नौ पार्टियों में मुख़्तार अंसारी और अफ़ज़ाल अंसारी की कौमी एकता दल भी जल्द शामिल हो सकती है। कौमी एकता दल सपा से बदला लेने के लिए इस फ्रंट में आ सकती है।

सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने का सन्देश
यूपी में साम्प्रदायिक ताकतों को जवाब देने को एकजुट हुए दर्जनभर दलों ने राजनीतिक परिवर्तन महासंघ बनाया है। जिलों में प्रभाव रखने वाले छोटे दल एक-दूसरे के सम्पर्क किया जा रहा है। यह पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेंगी। इसी महीने के अंत तक एक बड़े दल के रूप में ये पार्टियां जनता के सामने होंगी। पीस पार्टी के अध्यक्ष एवं खलीलाबाद के विधायक डा. अय्यूब तो कांग्रेस, सपा, बसपा, जद यू, रालोद जैसे बड़े दलों में सम्पर्क कर एक साथ आने का निवेदन भी कर चुके हैं।

वह ऐसे दलों से भी बात कर रह हैं जिनका मंडलों और जिलों में प्रभाव है।जिलों के तहसीलों तक में अपना प्रभाव रखने वाले कई छोटे दल यह मानते हैं कि मोदी सरकार के राज में साम्प्रदायिकता ने अपनी जड़ें मजबूत की हैं। बिहार के बाद अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश में सभी एकजुट हों और साम्प्रदायिकता को पटखनी दें।

कई दलों ने मिलकर राजनीतिक परिवर्तन महासंघ बनाया है, इसका संयोजक राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के आमिर रशादी को बनाया गया है। डा. अय्यूब ने बताया कि जदयू सहित एक दर्जन पार्टियों के प्रमुख लोगों से उनकी बात हो चुकी है। सभी एक मंच पर आने को तैयार हैं। झूठ और फर्जी वादे कर सत्ता में आयी भाजपा ने कोई वादा पूरा नहीं किया। अलबत्ता साम्प्रदायिक मामलों को और बढ़ा दिया। भाजपा का भेद खुल गया है। इनके झूठ और असलियत को हम जनता के समक्ष लाएंगे। सांप्रदायिक ताकतों को अब दोबारा सत्ता नसीब नहीं होगी। इनको रोकने के लिए कांग्रेस सहित कई अन्य पार्टियां भी उनके गठबंधन के साथ आ सकती हैं। महासंघ के संयोजक आमिर रशादी ने कहा कि कई दल हमारे सम्पर्क में हैं, कुछ ने साथ आने से मना भी कर दिया है। मगर, हम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया, नेशनल लीग, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, मुस्लिम मजलिस, परचम पार्टी आफ इंडिया, अवामी विकास पार्टी, वेलफेयर पार्टी आफ इंडिया हमारे साथ है।

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