
जनता की रसोई बलिया
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ.
patrika positive news कोरोना महामारी के भयावाह संकट के बीच बलिया के युवाओं की जनता रसोई गरीबों के पेट भर रही है। उत्साही युवा दोस्तों ने गांव के किसानों की मदद से नेशनल हाइवे पर पर गरीबों के लिये 'जनता रसोई' की शुरुआत की और रोजाना अनाज इकट्ठा कर 100 से 200 लोगों का पेट भर रहे हैं। इन लोगों ने जनता की रसोई का प्रबंधन कुछ इस तरह से किया है कि अब तक आर्थिक संकट उनके सामने नहीं आया। ये लोग आपस में अनाज जुटाते हैं और उसी से अपना किचन चलाते हैं, जिससे इनकी मदद की रसोई का चूल्हा लगातार जलकर गरीबों का पेट भर रहा है। इन लोगों ने पिछले साल लाॅक डाउन में भी ऐसा ही प्रयास किया था और जरूरतमंदों की मदद को आगे आए थे।
ऐसे हुई शुरुआत
‘जनता की रसोई’ गांव के कुछ उत्साही युवाओं द्वारा नेशनल हाइवे 31 पर शुरू की गई है। इससे जुड़े ज्यादातर लोग किसान हैं और खेती करते हैं। ये लोग आपस में अनाज इकट्रठा कर लेते हैं और उसी से जनता की रसोई में रोज भोजन पकता है। इस रसोई में व्यवस्था के अनुसार खिचड़ी से लेकर पूड़ी-सब्जी तक बनती है। यहां का बना भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं। समय के साथ इन लोगों ने युवा चेतना नामका एक संगठन बना लिया है। उनका संगठन पंजीकृत भले ही नहीं हुआ है पर मदद का काम बखूबी अंजाम दे रहा है।
जनता रसोई की टीम
‘जनता रसोई’ की एक पूरी टीम है। मुख्य रूप से इस टीम के अभिषेक ब्रह्मचारी, रोहित सिंह और अजय ओझा जैसे लोग रसोई के प्रबंधन की जिम्मेदारी देखते हैं। ओझा पिछले कई महीनों से इस काम में लगे हैं। इसी तरह हैबतपुर गांव के 75 वर्षीय किसान बैजू और जलालपुर के 57 वर्षीय मोहन सिंह भी परोपरकार की भावना से 'जनता रसोई' के साथ जुड़े हुये है ।हमारी बातचीत बहेड़ी के रहने वाले 22 वर्षीय सैफ नवाज से हुई। इन्होंने फार्मेसी में डिग्री हासिल की है और आगे की पढाई में लगे हैं। इन्होंने बताया कि वे भी जनता की रसोई में सहयोग करते हैं। इससे उन्हें काफी संतोष होता है।
क्या कहते हैं मददगार
फार्मेसी में डिग्री हासिल कर आगे की पढाई में जुटे बहेड़ी निवासी 22 साल के सैफ नवाज भी जनता की रसोई में सहयोग करते हैं। वो कहते हैं कि इससे उन्हें काफी संतोष होता है। युवा चेतना के रोहित सिंह ने बताया कि गांव के लोग स्वेच्छा से अपनी क्षमता के मुताबिक बराबर इस जनता की रसोई में सहयोग करते आये है। उनका मानना है कि इस प्रकार के सामूहिक प्रयासों से जहां एक ओर जरुरतमंद लोगों को भोजन मिल जाता है वहीं दूसरी ओऱ समाज में पारस्परिक सौहार्द का वातावरण भी बनता है। उन्होंने बताया कि जनता की रसोई सभी के लिए समान रुप से खुली रहती है। कोई भी कभी भी आकर के यहां पर खाना पा सकता है। लाकडाउन के दौरान इस बार भी लोगों के काम धंधे बंद हो गये हैं और उनके सामने चुनौती आ खड़ी हुई है। ऐसे में जनता की रसोई जैसे प्रयास लोगों को काफी राहत देने वाले हैं।
Published on:
16 May 2021 06:16 pm
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