उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार के अलावा प्रतिद्वंदी गिरोहों ने फूलन को पकड़ने की बहुत सी नाकाम कोशिशें कीं। इंदिरा गांधी की सरकार ने (1983) में उनसे समझौता किया की उन्हें (मृत्यु दंड) नहीं दिया जाएगा और उनके परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। फूलनदेवी ने इस शर्त को मान लिया क्योंकि उस वक्त तक उनके करीबी विक्रम मल्लाह की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी थी, जिसने फूलन को तोड़ कर रख दिया था। आत्म समर्पण के लिए फूलन ने कुछ अपनी शर्तें भी रखी थीं। 12 फरवरी, 1983 को उसने मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।