
Police Commissioner System: कानपुर और वाराणसी में भी होगी पुलिस कमिश्नरी, लखनऊ और नोएडा के बाद बड़ा कदम!
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. Police Commissioner System: राजधानी लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का निर्णय अपराध नियंत्रण के लिहाज से सफल साबित हुआ है। यातायात व्यवस्था में भी सुधार हुआ है। अपराध पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की बेहतरी के लिए प्रदेश के बड़े शहरों में इसके जल्द से जल्द विस्तार की जरूरत बताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जनवरी को लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने का निर्णय लिया था। लगभग 11 महीने पहले लखनऊ को पांच जोन में बांटकर डीसीपी यानी एसपी स्तर के अधिकारी को कमान सौंपी गई, जबकि नोएडा को तीन जोन में बांटा गया था। शासन ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के साथ ही हर छह माह में इसकी समीक्षा कराए जाने का निर्णय भी लिया था। दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की सफलता को देखते हुए अब इसके विस्तार की कवायद शुरू की गई है।
हालांकि पुलिस अधिकारी अभी इसको लेकर कुछ भी बोलने से मना कर रहे हैं। इसके पीछे वजह ये है कि अफसरों की एक लॉबी अपने संवर्ग के अधिकारियों के नफा-नुकसान को देखते हुए इसका विस्तार नहीं चाहती। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और कानपुर नगर में कमिश्नरेट की सख्त जरूरत बताई जा रही है। कोई बड़ी अड़चन नहीं आई तो जल्द ही इन दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू हो सकती है।
नई व्यवस्था के बेहतर परिणाम
हालांकि अभी यूपी के पुलिस कमिश्नरेट को उतने अधिकार नहीं दिये गए थे, जितने दिल्ली और मुंबई पुलिस कमिश्नरेट के पास हैं। फिर भी इसे कामयाब बनाने में न सिर्फ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरी ताकत झोंकी बल्कि इस नई व्यवस्था को आम लोगों ने भी सराहा। दोनों ही शहरों में अपराधों में काफी कमी आई और बड़ी समस्या यातायात व्यवस्था में काफी सुधार हुआ। पहले जहां दिल्ली की सीमा में प्रवेश करते ही सीट बेल्ट और हेलमेट नजर आता था, वह लखनऊ और नोएडा में भी नजर आने लगा। बड़ी संख्या में लोग 107 और 116 में पाबंद किये गए और कार्रवाई की गई। इसके अलावा लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के अफसरों की सूझबूझ से सीएए-एनआरसी के विरोध में हो रहा प्रदर्शन बिना किसी अव्यवस्था के निपट गया। इसके अलावा पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू होने के बाद नोएडा में भी अपराधों में काफी कमी आई।
क्या है कमिश्नर व्यवस्था
भारतीय पुलिस अधिनियम के तहत डीएम के पास पुलिस पर नियंत्रण के अधिकार होते हैं। कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद ये अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाएंगे। सीआरपीसी के तहत एग्जिक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के अधिकार, जो प्रशासन के पास होते हैं वे पुलिस के पास होंगे। कमिश्नर व्यवस्था लागू होने के बाद डीएम के पास पुलिस का नियंत्रण नहीं होगा। धारा-144 लागू करने, कर्फ्यू लगाने का अधिकार, गैंगस्टर और गुंडा ऐक्ट की कार्रवाई पुलिस सीधे कर सकेगी। जुलूस-प्रदर्शन की अनुमति पुलिस देगी, सीआरपीसी की धारा 151 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई भी कर सकेगी। ये अधिकार अब तक डीएम व प्रशासनिक अफसरों के पास थे। हालांकि लेकिन राजस्व से जुड़े अधिकार डीएम के पास ही रहता है। आर्म्स ऐक्ट, सराय ऐक्ट, आबकारी, मनोरंजन कर और परिवहन आदि जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र में ही रहता है।
क्या कहते हैं अफसर
- लखनऊ के पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर का कहना है कि लखनऊ में पहले भी मेरी तैनाती एसएसपी , डीआईजी के रूप में रह चुकी है। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के फायदे आम जनता से जुड़े हुए हैं। पुलिस के व्यवहार में अंतर, ट्रैफिक में सुधार, थानों से लेकर पुलिस कमिश्नर स्तर तक सुनवाई और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ी है।
- वहीं नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह के मुताबिक नई व्यवस्था में पुलिस ने टीम वर्क के रूप में काम किया है। हर अपराध में कमी आई है। अपराधियों की संपत्तियों को जब्त किया गया है। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में भी पहले से काफी कमी आई है।
- प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने कहा कि दोनों ही शहरों में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्थी पूरी तरह से सफल रही है। अपराध पर भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा नियंत्रण रहा है। पुलिसिंग के नजरिये से लखनऊ और नोएडा में इससे पहले कभी इतनी अच्छी व्यवस्था नहीं रही। यातायात व्यवस्था में भी काफी सुधार हुआ है।
Published on:
21 Dec 2020 03:31 pm
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