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जानिए कौन हैं सावित्रीबाई फुले, जो 19 जनवरी को करने जा रही नई पार्टी का ऐलान

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सावित्री बाई फुले ने भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा था।

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लखनऊ

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Neeraj Patel

Dec 26, 2019

Savitri bai

जानिए कौन हैं सावित्रीबाई फुले, जो 19 जनवरी को करने जा रही नई पार्टी का ऐलान

लखनऊ. लोकसभा चुनाव 2019 के पहले कांग्रेस की सदस्यता लेने वाली पूर्व भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर अपनी आवाज न सुने जाने का आरोप लगाया है। सावित्री फुले ने कहा कि वह नई पार्टी बनाएंगी और दलितों की आवाज उठाएंगी। नई पार्टी का एलान वह लखनऊ में 19 जनवरी को कर सकती हैं।

बता दें कि बहराइच की पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले ने 6 दिसंबर 2018 को लखनऊ में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे का ऐलान किया था। हालांकि, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में मेरी आवाज नहीं सुनी जा रही। इसलिए मैं इस्तीफा दे रही हूं। मैं अपनी खुद की पार्टी बनाऊंगी। दरअसल, पिछले साल ही लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सावित्री बाई फुले ने भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा था।

यूपी के जिले बहराइच से रहीं पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले ने 2012 में बीजेपी के टिकट पर बलहा (सुरक्षित) विधानसभा सीट से चुनाव जीता था और 2014 में उन्हें सांसद का टिकट मिला और वह संसद पहुंची थीं। वह बीजेपी की दलित महिला चेहरा थीं, बाद में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। छह साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी लेकिन उनकी विदाई नहीं हुई। इसके बाद बड़े होने पर उन्होंने संन्यास ले लिया।

सावित्री फूले अपने तेवर के लिए मशहूर

सांसद सावित्री बाई फूले अपने तीखे तेवरों के लिए बहुत ही मशहूर रही हैं। बसपा से जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद भाजपा में पहुंची सावित्री को वर्ष 2012 में बलहा विधान से टिकट दिया गया था। इस चुनाव में धमाकेदार जीत से उनका भाजपा में बड़ा कदम रहा है। इसका फायदा वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा संगठन ने सभी दावेदारों को दरकिनार कर उन्हें बहराइच लोकसभा सीट से मैदान में उतारा। मोदी लहर में जीत हासिल कर संसद पहुंची सांसद फूले उस समय से सुर्खियों में आईं जब बहराइच-बाराबंकी हाइवे की गुणवत्ता को लेकर वो धरने पर बैठीं। इसके सांसद ने अनुसूचित जाति, आरक्षण व संविधान को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

अनुसूचित जाति की रैली का कर चुकीं जनजागरण

सांसद फूले खुद को प्रदेश में अनुसूचित जाति की नेता स्थापित करने के लिए नमो बुद्धाय सेवा समिति के माध्यम से लखनऊ समेत लगभग दो दर्जन जिलों में भी कर चुकी हैं। डेढ़ वर्षों से आरएसएस, भाजपा संगठन, सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को कोस रहीं सांसद फूले संगठन में बनी रहीं। अपने को कांशीराम का अनुयायी और नानपारा में अपने घर के गेट पर लगी कांशीराम की प्रतिमा भी उनकी आस्था का केंद्र बिंदू रही।

राम भगवान को लेकर दिया था विवादित बयान

बहराइच से बीजेपी सांसद सावित्रीबाई फुले ने इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी समाज में विभाजन करने की कोशिश कर रही है। बता दें कि सावित्रीबाई फुले ने हाल ही भगवान राम को लेकर एक विवादित बयान भी दिया था। उन्होंने भगवान राम को मनुवादी बताया था। फुले ने कहा बजरंगबली अगर दलित नहीं थे तो उन्हें इंसान क्यों नहीं बनाया गया उन्हें बंदर क्यों बनाया गया? उनके मुंह में कालिख क्यों लगाई गई और पूछे क्यों लगाई गई? सावित्री बाई फुले ने कहा था कि आज मंदिर और कुंभ के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। अगर यही पैसे गरीबों में बांट दिए जाए तो शायद गरीबी की गरीबी कम हो जाएगी।