
यूपी की जनसंख्या नियंत्रण नीति 11 राज्यों से भी होगी ज्यादा सख्त, पढ़ें वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं
पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी
लखनऊ. 2015 में गोरखपुर से तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने एक ऑनलाइन पोल किया था जिसमें पूछा गया था कि क्या मोदी सरकार को जनसंख्या निंयत्रण पर कोई नीति बनानी चाहिए। इस पोल के नतीजे चौकाने वाले थे। 80 फीसद से अधिक ने आबादी नियंत्रण पर सख्त कानून बनाने की वकालत की थी। योगी आदित्यनाथ ने तब से ही यह मन बना लिया था कि दो से ज्यादा बच्चे वालों के लिए सख्त नियम की जरूरत है। अब खुद जब योगी यूपी के सीएम हैं वह जनसंख्या नियंत्रण पर बेहद सख्त कानून लाने जा रहे हैं। यह कानून तमाम राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े कानूनों से अलग और ज्यादा प्रभावशाली होगा। कानून में यह प्रावधान होगा कि जिनके ज्यादा बच्चे हैं उन्हें न तो सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ मिलेगा न ही वे पंचायत चुनाव में भाग ले सकेंगे। विशेषज्ञ समिति ने देश के 11 राज्यों में लागू जनसंख्या नियंत्रणी नीति से भी सख्त कानून बनाने का सुझाव दिया है ताकि यूपी की बढ़ती आबादी को नियंत्रित किया जा सके। आइए जानते हैं 11 राज्यों में किस तरह का है कानून। इससे सख्त कानून बना तो क्या पड़ेगा असर-
जनसंख्या नियंत्रण क़ानून हो इतना सख्त...
- दो बच्चों के नियम का उल्लंघन करने पर राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता, बिजली कनेक्शन और मोबाइल कनेक्शन हो बंद
- सरकारी नौकरी पाने, चुनाव लडऩे, पार्टी में बड़ा पद पाने पर भी लगे आजीवन प्रतिबंध
- दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी स्कूल, हॉस्पिटल और बाक़ी सरकारी सुविधाएं भी न मिलें
11 राज्य जहां लागू है जनसंख्या नियंत्रण नीति
1. असम-एक जनवरी 2021 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
2. ओडिशा- दो से अधिक बच्चे वालों को अरबन लोकल बॉडी इलेक्शन लडऩे की इजाजत नहीं
3. बिहार-टू चाइल्ड पॉलिसी नगर पालिका चुनाव लडऩे की इजाज़त नहीं देती
4. उत्तराखंड- टू चाइल्ड पॉलिसी सिर्फ नगर पालिका चुनावों तक सीमित
5. महाराष्ट्र -दो से अधिक बच्चे वालों को ग्राम पंचायत और नगर पालिका के चुनाव लडऩे पर रोक
-महाराष्ट्र सिविल सर्विसेस रूल्स ऑफ 2005 के अनुसार ऐसे शख्स को राज्य सरकार में कोई पद भी नहीं मिल सकता
-जिन महिलाओं को दो से ज्यादा बच्चे वे पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के फायदों से बेदखल
6. आंध्र प्रदेश- 1994 में पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लडऩे रोक
7. तेलंगाना- पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लडऩे रोक
8. राजस्थान- पंचायती एक्ट 1994 के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य
-दो से अधिक बच्चे वाले केवल तभी चुनाव लड़ सकते हैं यदि उनके पहले दो बच्चों में से कोई एक दिव्यांग हो
9. गुजरात में लोकल अथॉरिटीज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत और नगर पालिका के चुनाव नहीं लड़ सकते
10. मध्य प्रदेश 2001 में टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लडऩे पर थी रोक, लेकिन 2005 में फैसला बदल दिया
-सरकारी नौकरियों और ज्यूडिशियल सेवाओं में अब भी टू चाइल्ड पॉलिसी लागू
11. छत्तीसगढ़-टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लडऩे पर थी रोक, लेकिन 2005 में फैसला बदल दिया
-सरकारी नौकरियों और ज्यूडिशियल सेवाओं में अब भी टू चाइल्ड पॉलिसी लागू
क्या कहता है संविधान
- 1976 में 42वां संविधान संशोधन विधेयक पास हुआ। संविधान की सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन जोड़ा गया।
- 42वें संविधान संशोधन ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया।
- 'हम दो, हमारे दो' कानून बनाने को लेकर 09 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया
- 15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी जी ने देश में बढ़ती जनसंख्या की समस्या पर भाषण दिया।
- 11 अक्टूबर 2019 से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून को लेकर मेरठ से दिल्ली तक एक समाधान मार्च निकाला गया
- यह मार्च केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, सांसद राजेंद्र अग्रवाल और स्वामी यतीन्द्रानंद गिरी की अगुवाई में निकाला गया
- 21 जनवरी 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण पर सरकार को क़ानून बनाने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया
विशेषज्ञ समिति के सुझाव, दो से अधिक बच्चे हुए तो नहीं...
- जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें पंचायत चुनाव लडऩे की अनुमति न दी जाए।
- दो से ज्यादा बच्चे वालों को किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- जिन सरकारी कर्मचारियों के दो से अधिक बच्चे उन्हें नहीं मिलेगा स्कूल शुल्क भत्ता।
क्या कहते हैं यूपी के जिम्मेदार
जल्द लागू होगी नई जनसंख्या नियंत्रण नीति
यूपी के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का कहना है कि नई जनसंख्या नीति पर काम पूरा हो चुका है। अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या नीति को पढ़ा गया है और इसमें से सबसे अच्छी नीति को यूपी में लागू किया जाएगा। इस समय विशेषज्ञों का एक समूह नई नीति के ड्राफ्ट की समीक्षा कर रहा है।
बढ़ती आबादी बड़ी समस्या, होगा बड़ा फैसला
विशेषज्ञों के समूह का हिस्सा और परिवार कल्याण महानिदेशक डॉक्टर बद्री विशाल का कहना है कि यूपी की जनसंख्या नीति की समीक्षा साल 2000 में हुई थी। इस बीच यूपी का आबादी काफी बढ़ गयी। जबकि, दक्षिण के राज्य अपनी जनसंख्या को नियंत्रण करने में कामयाब रहे हैं। कई राज्यों में जिनके ज्यादा बच्चे हैं उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। यूपी में कुछ बड़ा फैसला लेने पर विचार हो रहा है।
देश की कुल आबादी का 16 फीसद यूपी में
कि साल 2011 की जनगणना के अनुसार, यूपी भारत का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला प्रदेश है। जिसकी कुल आबादी 20 करोड़ है, यह भारत की कुल आबादी का 16 फीसदी है। हालांकि यह संख्या अब 25 करोड़ को पार कर चुकी है।
केंद्रीय मंत्रियों के आबादी नियंत्रण पर क्या हैं विचार
जब तक जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक हम कामयाब नहीं होंगे।
-साध्वी निरंजन ज्योति,केंद्रीय मंत्री भारत सरकार
जनसंख्या नियंत्रण पर ऐसा कानून आना चाहिए कि जो ना माने, उसका वोटिंग का अधिकार खत्म कर देना चाहिए।
गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार
Published on:
06 Mar 2020 02:55 pm
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