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क्या इस बार ‘फिक्स’ था अन्ना का अनशन, उन्हीं के सहयोगी ने पत्र लिखकर उठाया सवाल

कुछ साल पहले अपने अनशन के दम पर सत्ता हिल्लाने वाले अन्ना हजारे को इस बार उतना सहयोग नही मिला जिस कारण उन्हें अनशन खत्म करना पड़ा।

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anna

लखनऊ. कुछ साल पहले अपने अनशन के दम पर सत्ता हिल्लाने वाले अन्ना हजारे को इस बार उतना सहयोग नही मिला जिस कारण उन्हें अनशन खत्म करना पड़ा। अब अन्ना आन्दोलन के नेशनल कोर टीम मेम्बर प्रताप चन्द्रा ने ही अन्ना को खुला पत्र लिख आंदोलन पर कई सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने आंदोलन में 'फिक्सिंग' का शक जताया है। उन्होंने पत्र में लिखा की कई लोग अन्ना के आसपास होने का भ्रम बनाकर करीब दिखने की कोशिश करते रहे, भले ही उनका सार्वजनिक जीवन और जनाधार लगभग शून्य है पर वो खुद को बड़ा बताकर, अन्य लोगों की शिकायत करके आपको सिर्फ भ्रमित करते रहे जिसका खामियाजा आन्दोलन को भुगतना पड़ा।

जानें क्या लिखा है पत्र में-

प्रताप चंद्रा ने लिखा है-'' आन्दोलन में लगे सदमे से बाहर आने में एक माह लगा खैर अब ठीक हूँ, आपने आन्दोलन के नेशनल कोर टीम में मुझे रखा इसके लिए आभार, परन्तु गलत को गलत और सही को सही कहना ही सीखा है लिहाज़ा आन्दोलन के विषय में अपनी समझ आपको बताना जरुरी समझता हूँ तथा पारदर्शिता के लिए खुला पत्र लिख रहा हूं।

सबकुछ हमें ऐसा लगता है कि आन्दोलन जिस प्रकार से शुरू हुआ, रणनिति बनी, कोर टीम बनी, आन्दोलन शुरू होकर जिस तरह ख़त्म हुआ वो पूर्व निर्धारित लगती है जिससे संशय होता है जिसका उल्लेख निम्न है :

नेशनल कोर कमिटी का गठन : कोर कमेटी में कई लोग शामिल हुए जैसे कर्नल दिनेश नैन, राकेश रफीक, दशरथ, सुशिल भट्ट, भोपाल सिंह समेत कई जो सिर्फ आपके आसपास होने का भ्रम बनाकर करीब दिखने की कोशिश करते रहे, भले ही उनका सार्वजनिक जीवन और जनाधार लगभग शून्य है पर वो खुद को बड़ा बताकर, अन्य लोगों की शिकायत करके आपको सिर्फ भ्रमित करते रहे जिसका खामियाजा आन्दोलन को भुगतना पड़ा जबकि कर्मठ कार्यकर्ता संजय सिसौदिया, अशोक गौतम, विष्णु कान्त शर्मा आदि को नहीं लिया पर ये लोग काम करते रहे, हालाँकि ये आपका पूर्ण अधिकार है परन्तु अयोग्य को स्थान योग्य को बाहर रखने से ये प्रश्न खड़ा होता है।

आपके खिलाफ, आपके बारे में तमाम आरोप यहाँ तक कि भाजपा का एजेंट तक लाखों लोगों नें सोशल मीडिया और सडकों पे कहा, पर कोई समर्थक उसपर नहीं आपपर यकीन किया परन्तु आपको किसी के बारे में शिकायत मिली, कुछ किसी के लिए कह भर दिया, मेल भेज दे तो आप उसपर यकीन करके उसे दूर कर देते हैं यहाँ तक कि स्पष्टीकरण भी नहीं मांगते, अगर कार्यकर्ता को नेता पे भरोसा है तो नेता को कार्यकर्ता पे क्यूँ नहीं भरोसा हो ?........................

(पत्र के मुख्य अंश जो प्रताप चंद्रा की ओर से भेजा गया है)