
लखनऊ. यूपीएसईई की काउंसलिंग खत्म होने के बाद एक लाख से ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं। इनमें अधिकतर सीटें निजी संस्थानों की हैं। इसी कारण प्राइवेट इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में छात्र की खरीद फरोख्त हो रही है। यहां की खाली सीटों को भरने के लिए दूसरे प्रदेशों से छात्र बटोरे जा रहे हैं। दरअसल एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट समेत अन्य पाठ्यक्रमों की करीब 1.64 लाख सीटें हैं। इसमें कई विश्वविद्यालयों की सीट शामिल हैं। करीब 1.30 लाख सीट सिर्फ प्राइवेट संस्थानों की है। पांच चरणों की काउंसलिंग के बाद करीब 20 हजार पर दाखिले हो सके हैं। विश्वविद्यालय ने अब निजी कॉलेजों को सीधे दाखिले की अनुमति दी है। जिसके बाद फर्जीवाड़े का खेल तेजी से शुरू हो गया है।
पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि निजी कॉलेजों ने दूसरे प्रदेश से बच्चे लाने के लिए जाल बिछा दिया है। सूत्रों के मुताबिक कुछ लोगों को इस काम में लगाया गया है जो दूसरे प्रदेशों के छात्रों को लुभावने ऑफर्स देकर यूपी के संस्थानों में एडमिशन के लिए बुलाया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो इस बार बिहार में बड़ी संख्या में छात्र फेल हुए हैं। ऐसे में अपनी दुकान को बचाने के लिए इन दाखिला माफियाओं ने फर्जी बोर्ड का सहारा ले रहे हैं। दलाल पास की मार्कशीट और दाखिला कराने के नाम पर छात्रों से 20 से 30 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। वहीं, दाखिला कराने पर कॉलेजों से 20 से 25 हजार रुपये की कमीशन ली जा रही है। इस पूरे खेल में राजधानी के सीतापुर रोड़, बाराबंकी रोड में संचालित कुछ कॉलेजों के नाम भी सामने आए हैं।
पिछले दिनों निजी इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में सीधे दाखिले के लिए आवेदन करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों के पंजीकरण रद्द कर दिए गए हैं। वहीं, कॉलेजों के खिलाफ जांच भी बैठा दी गई है। ये अभ्यर्थी फर्जी शिक्षा बोर्ड की मार्कशीट के सहारे दाखिले लेने की कोशिश कर रहे थे। एकेटीयू के वीसी प्रो. विनय पाठक ने बताया कि ऐसे सभी आवेदनों को कैंसिल कर दिया गया है। इसके अलावा, पिछले सालों में भी ऐसे फर्जी बोर्ड की मार्कशीट से दाखिले लेने वालों की जांच की जा रही है। यहां कॉलेजों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। इन्हें चिन्हित किया जा रहा है। इस तरह के फर्जीवाड़े में शामिल किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।
इसलिए खाली रह गई सीटें
यूपीएसईई के पांचवें राउंड की काउंसलिंग खत्म होने के बाद भी लगभग 1.44 हजार सीटें खाली रह गई हैं। डायरेक्ट एडमिशन के जरिए भी इतनी सीटें भरना लगभग नामुमकिन हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों का स्तर नीचे गिर गया है या स्टूडेंट्स की इंजीनियरिंग से मोहभंग हो गया है। इस पर एकेटीयू की कुलपति प्रो. विनय पाठक का कहना है कि कई निजी संस्थानों में पढ़ाई का स्तर बेहद खराब उन्हें बंद कर देना चाहिए।
उनके मुताबिक कम छात्रों का एडमिशन लेना चिंता जनक है लेकिन वे इससे आश्चर्यचकित नहीं हैं क्योंकि कई निजी संस्थानों में पढ़ाई का स्तर बेहद गिरा हुआ है यही कारण है कि छात्र वहां एडमिशन नहीं लेते। हम ऑर्डिनेंस लाकर ऐसे संस्थानों को बंद करवाना चाहते हैं।
Published on:
09 Aug 2017 02:21 pm
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