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इस साल मुश्किल है बेटियों की सस्ती और अच्छी शिक्षा

कम फीस में बच्चों को पढा़ने के लिए अभिभावक काफी मशक्कत करते हैं। करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज शुरू करने की घोषणा की गई थी।

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लखनऊ. कम फीस में बच्चों को पढा़ने के लिए अभिभावक काफी मशक्कत करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज शुरू करने की घोषणा की गई थी। इसके लिए बीते जनवरी से ही डिप्टी सीएम एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने स्कूल भवन का उद्घाटन कर जिम्मेदारों को नए सेशन से संचालन शुरू करने करने की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन शासन-प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

न फर्नीचर, न टीचर

जनवरी में उद्घाटन के बावजूद इन स्कूलों में न तो छात्राओं के बैठने के लिए फर्नीचर है और न ही टीचर. शिक्षकों के पद भी सृजित नहीं किए गए हैं. छोटी जुबिली के साथ-साथ ऐसा ही हाल राजकीय कन्या इंटर कॉलेज चिनहट बेहटा, एवं सैरपुर जियामऊ का भी है। छोटी जुबिली को इस उद्देश्य के साथ तैयार कराया गया था, ताकि नए सेशन से यहां पठन पाठन शुरू हो सके। राजधानी के कई इलाकों में काफी समय पहले राजकीय बालिका इंटर कॉलेज खोलने की मंजूरी दी गई थी. इसमें राजकीय कन्या इंटर कॉलेज जियामऊ, बेहटा और चिनहट के अलावा छोटी जुबिली में कन्या इंटर कॉलेज की स्थापना की गई. सरकार का उद्देश्य था कि इससे लड़कियों को शिक्षित किया जा सके।


बजट भी जारी किया गया

इन स्कूलों के लिए बजट भी जारी किया गया और निर्माण की समय सीमा भी निर्धारित की गई. लेकिन निर्माण कार्य में काफी देर होती गई। अब जब इन सभी राजकीय स्कूलों का निर्माण पूरा हो चुका है तो फर्नीचर और शिक्षकों की कमी सामने आ गई है। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज छोटी जुबिली का तो डिप्टी सीएम ने उद्घाटन भी कर दिया था, फिर भी नए सेशन से इन स्कूलों का संचालन नहीं शुरू हो सका है।

नया सेशन शुरू, शिक्षक नियुक्ति नहीं

मिली जानकारी के मुताबिक डिप्टी सीएम डॉ. शर्मा ने निर्देश दिए थे कि नए सेशन के शुरू होने के साथ ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज जियामऊ, बेहटा, चिनहट, सैरपुर के अलावा छोटी जुबिली में पढ़ाई शुरू हो जाए। विभाग के जिम्मेदारों ने इस गंभीरता से नहीं लिया। इसी का परिणाम है कि अब तक शिक्षकों के पद ही नहीं सृजित किए जा सके हैं और न ही फर्नीचर खरीदा जा सका है। स्थिति यह है कि मार्च में आए फर्नीचर के बजट को भी वापस कर दिया गया है।


बजट के अभाव में फंस गए स्कूल

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान आएमएसए के अतंर्गत साल 2013-14 में कई राजकीय स्कूलों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। साल 2015-16 में राजकीय हाईस्कूल मड़ियावं, राजकीय हाईस्कूल पल्हेंदा, राजकीय हाईस्कूल रसूलपूर सादात, राजकीय हाईस्कूल बीबीपुर का निर्माण शुरू कराया गया. मौजूदा समय में इन स्कूलों के भवन लगभग बनकर तैयार है. लेकिन केंद्र सरकार की ओर से प्रति स्कूल 14 लाख पांच हजार रुपए की अवशेष धनराशि न मिलने के कारण इन स्कूलों की फिनिशिंग का कार्य पूरा नहीं हो सका है।


आरटीई से एडमिशन में अड़चन


शहर के कुछ निजी स्कूलों ने बच्चों को सशर्त शिक्षा का अधिकार (आरटीई) देने का फरमान जारी किया है। कानून का हवाला देकर सिर्फ छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को दाखिला लेने की बात कही है। यह हाल तब है जबकि, इनमें से कई स्कूलों की बिना मान्यता की शाखाएं धड़ल्ले से चल रही हैं। जोकि, नियम: पूरी तरह से गलत है। हाल में ही निरालानगर के न्यू वे सीनियर सेकंडरी स्कूल का मामला सामने भी आया। इस स्कूल की शहर में तीन शाखाएं संचालित हो रही हैं। एक गोमतीनगर में, दूसरी निरालानगर और तीसरी अलीगंज में । जबकि, सीबीएसई की मान्यता सिर्फ निरालानगर शाखा के पास ही है। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री डॉ. आरपी मिश्र की मानें तो, 2000 से ज्यादा फर्जी स्कूलों का संचालन शहर में हो रहा है। जबकि, आरटीई के लागू होने के बाद से ही इन्हें बंद करा दिया जाना चाहिए था।