लखनऊ. अब आप को आरएसएस के कार्यकर्ता हाफ खाकी की जगह फुल भूरी पैंट में नजर आएंगे। क्योंकि आरएसएस अपने ड्रेस कोड को मेकओवर करते हुए 90 साल पुराने ड्रेस कोड को बदल दिया है। जिसके चलते अब स्वयंसेवक खाकी हाफ पैंट की जगह भूरे रंग की फुल पैंट पहन के शाखा लगाएंगे।
ड्रेस कोड से सबंधित ये फैसला राजस्थान के नागौर में लिया गया है जहां आरएसएस की तीन दिवसीय कार्यशाला चल रही थी जिसके अंतिम दिन ये अहम फैसला लिया गया। इस फैसले पर जानकारी देते हुए आरएसएस से जुड़े लखनऊ के कार्यकर्ता योगेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि ये बदलाव समय की मांग है। ड्रेस में बदलाव को बड़ी बात न मानते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पहचान केवल खाकी हाफ पैंट से ही नहीं है, बल्कि अन्य कई चीजें भी हैं, जो हमारी पहचान में शामिल हैं। जब हम नए रंग का उपयोग करना शुरू कर देंगे, तो लोगों को धीरे-धीरे इसकी आदत हो जाएगी।
जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक खाकी पैंट के साथ काली टोपी, सफेद शर्ट, भूरे मोजे और बांस का डंडा आरएसएस के पारंपरिक परिधान में शामिल रहे हैं, जिन्हें 'गणवेश' कहा जाता है लेकिन अब बदलाव के बाद आरएसएस के स्वयंसेवक भूरे संग की फुल पैंट में नजर आएंगे।
कुछ स्वयंसेवकों को है रंग को लेकर विरोध
आरएसएस के ड्रेस कोड में परिवर्तन के बाद से संगठन के कुछ लोगों ने बदलाव का विरोध भी किया। कुछ सदस्यों ने पैंट का रंग बदलने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का कहना है कि खाकी रंग एक प्रतीक है, जिसे नहीं बदला जाना चाहिए। ठीक उसी प्रकार से जैसे नीले रंग को दलितों से जोड़कर देखा जाता है, वैसे ही यह संघ का राजनीतिक प्रतीक है।
11 अकटूबर से लागू होगी नई वर्दी
संघ ने विजियादशमी के मौके पर 11 अक्टूबर से नई वर्दी लागू करने की घोषणा की है। संयोग से इसी दिन संगठन का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है।
250 रूपये में मिलेगी पैंट
आरएसएस के ड्रेस कोड के इस बदलाव के बाद से फुल भूरे पैंट की बिक्री भी शुरू हो गई है। जिसकी कीमत 250 रूपए रखी गई है। जानकारी के अनुसार पहली खेप ने सात लाख पैंटों का निर्माण कराया गया है। जिसमें लगभग दो लाख पैंटे आरएसएस के कार्यालयों में पहुंचाई जा चुंकी हैं।