
पंखुड़ी पाठक के इस्तीफे की ये है असल वजह, अखिलेश से पहले ही कह चुकी थीं ये बात
लखनऊ. समाजवादी पार्टी की नई मीडिया पैनेलिस्ट सूची से पंखुड़ी पाठक और अनिल यादव का नाम गायब है। सोमवार को लिस्ट जारी होने के तुरंत बाद पंखुड़ी पाठक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। पंखुड़ी पाठक ने कहा कि मैं समाजवादी पार्टी से अपने सम्बंध ख़त्म कर रही हूँ। पिछले कुछ समय से पार्टी में चल रही राजनीति में मेरा दम घुटने लगा है। जाति और लिं ग को आधार बना कर जिस तरह पार्टी के ही लोगों द्वारा पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं पर हमला किया जाता है और नेतृत्व की जानकारी के बावजूद कारवाई नहीं की जाती यह दर्शाता है कि पार्टी अपनी विचारधारा से भटक चुकी है।
पत्रिका से बातचीत में पंखुड़ी ने रखी अपनी बात
हालांकि पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सपा की नई लिस्ट में दोनों का नाम हटना तय था। दोनों हाल ही में बिना आलाकमान की इजाजत से एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने विदेश यात्रा गए थे। पत्रिका ने जब सपा पदाधिकारियों से इस संबंध में बात करने का प्रयास किया तो किसी भी नेता ने इस विषय पर बोलने से मना कर दिया। उनका कहना था कि ये पार्टी आलाकमान की ओर से निर्णय लिया गया है।
'पार्टी में जमकर जातिवाद, इसलिए इस्तीफा दिया'
पत्रिका ने बातचीत में पंखुड़ी ने कहा कि पार्टी में जातिवाद बहुत ज्यादा बढ़ गया था। शायद ब्राह्मण होने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी। उन्हें पार्टी की एक्टिविटीज में ठीक से काम नहीं करने दिया जा रहा है। पार्टी के इंटर्नल वॉट्सऐप ग्रुप्स व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में भी उनके खिलाफ लिखा गया जिससे वे काफी दिनों से आहत थीं। उन्होंने अखिलेश यादव को भी इस बात की जानकारी भी दी थी। उन्हें आश्वासन मिला था कि जल्द ही हालातों में सुधार होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिरकार उन्हें इस्तीफ देना पड़ा।
कांग्रेस या किसी अन्य दल में जाने पर चुप्पी
बता दें कि पंखुड़ी स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स से मुख्यधारा की राजनीति में आई हैं। वे दिल्ली के हंसराज कॉलेज में छात्र नेता रही हैं। उन्हें लेखन में काफी रुचि है । हाल ही में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर ब्लॉग लिखा था। इसके अलावा तेज प्रताप यादव के बारे में भी वे लिख चुकी हैं। जब उनसे पूछ गया कि क्या वह कांग्रेस जॉइन करेंगी? तो इस सवाल के जवाब में वह बोलीं कि वह बीजेपी के अलावा ही कोई दल जॉइन करना चाहती हैं लेकिन अभी कुछ तय नहीं है।
जानें क्या लिखा पंखुड़ी ने ट्विटर पर
मुझे पता है कि इसके बाद मेरे बारे में तरह तरह की अफ़वाहें फैलायी जाएगी लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहती हूँ कि मैं किसी भी राजनैतिक दल से सम्पर्क में नहीं हूँ ना ही किसी से जुड़ने का सोच रही हूँ। अन्य ज़िम्मेदारियों के चलते जो उच्च शिक्षा अधूरी रह थी अब उसे पूरा करने का प्रयास करूंगी। कभी जाति कभी धर्म तो कभी जेंडर को ले कर जिस तरह की अभद्र टिप्पणियाँ लगातार की जाती हैं और पार्टी नेतृत्व सब कुछ जान कर भी शांत रहता है यह दिखता है कि नेतृत्व ने भी इस स्तर की राजनीति को स्वीकार कर लिया है। ऐसे माहौल में अपने स्वाभिमान के साथ समझौता कर के बने रहना अब मुमकिन नहीं है
Published on:
27 Aug 2018 09:16 pm
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