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इस फोरम के जरिए छात्रों की आवाज उठाएंगे छात्रनेता

त्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए राजधानी के छात्र नेताओं ने मिलकर 'सादर' फोरम का गठन किया है।

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इस फोरम के जरिए छात्रों की आवाज उठाएंगे छात्रनेता

लखनऊ. छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए राजधानी के छात्र नेताओं ने मिलकर 'सादर' फोरम का गठन किया है। स्टूडेंट्स अलायन्स फॉर डिमोक्रेटिक राइट्स (सादर) नामक इस फोरम में तमाम छात्र नेता राजधानी के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों की आवाज उठाएंगे। इस बात की जानकारी छात्र नेता पूजा शुक्ला, सुधांशु वाजपेयी, दुर्गेश चौधरी ज्योति राय, वंशराज दुबे ने दी।पूजा शुक्ला ने बताया कि छात्रों के हितों के लिए इस फोरम का गठन किया गया है। जानें क्या होगा फोरम में-

-परामर्श मंडल में पूर्व छात्र नेताओं ,छात्र हितैषी प्रोफेसर्स ,कुलपति, आदि भी शामिल होंगे।

-पहला चरण 16 से 22 जुलाई से 7 दिवसीय : हमें जवाब चाहिये:सात दिन:सात सवाल:सात विश्वविद्यालय

-लखनऊ के छात्रों के बीच चलाया जायेगा हस्ताक्षर अभियान, सात सवालों पर अभियान चलाया जाएगा,अख़बारों के संपादकों से,प्रशासन से ,बोद्धिकों से मिला जाएगा। जिसका मुख्य मुद्दा लविवि में छात्रों की प्रवेश बहाली और कैम्पसों में लोकतंत्र बहाली ,गार्डों की बहाली होगा। साथ ही राजधानी समेत प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ-लोकतंत्र बहाली मुख्य मुद्दा होगा।
23 जुलाई को मनाया जाएगा आज़ाद दिवस- "कैम्पस मेरा आपका नहीं वीसी- प्रॉक्टर खाप का" की थीम पर छात्र शिक्षक संवाद आयोजित होगा। इसमें पूर्वन्यायाधीश,शिक्षक ,कुलपति आदि शामिल होंगे।

-दूसरा चरण:24जुलाई से 12अगस्त तक राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जाएगा,12 अगस्त को देश भर के विभिन्न छात्रों, शिक्षकों ,पूर्व कुलपतियों की जन संसद होगी। 12 अगस्त वो ऐतिहासिक दिन ,जब 1936 में लखनऊ से ही देश के पहले संगठित छात्र आंदोलन-संगठन की नींव पड़ी थी, जिसमें नेहरु जी,सुभाष चंद्र बोस आदि ने संबोधित किया था।


-प्रशासन द्वारा अनुशासन के नाम पर छात्रों का दमन,उनपर आपराधिक मुक़दमे की तानाशाही प्रवृत्तियाँ बंद हों वहीं फीस वृद्धि, पढ़ाई लिखाई, हॉस्टल ,मेस आदि संबंधी फैसलों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो। सभी कैम्पसों में लोकतान्त्रिक ढंग से छात्रसंघ चुनाव कराया जाए।इन मुद्दों पर जनसंसद होगी।

एलयू विवाद के बाद लिया गया फैसला

बता दें कि पूजा शुक्ला, गौरव त्रिपाठी समेत कई छात्रों को एलयू में एडमिशन नहीं दिया गया जिसके बाद ये छात्र अनशन पर बैठे थे। इन छात्रों पर आरोप है कि पिछले साल लखनऊ यूनिवर्सिटी में हो रहे एक कार्यक्रम का विरोध किया था। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को काले झंडे दिखाए गए थे। इसके बाद उन्हें 26 दिन में रहना पड़ा था।