
एलयू के पूर्व पदाधिकारियों ने कहा-तीन हफ्ते में सुलझाएं मामला नहीं तो होगा आंदोलन
लखनऊ. लखनऊ यूनिवर्सिटी में कुछ छात्रों को एडमिशन न दिए जाने के मुद्दे को उठाते हुए छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को तीन हफ्ते में मामला सुलझाने की मांग की है। पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी अतुल अनजान, अरविंद सिंह गोप, सत्यदेव त्रिपाठी, रमेश दीक्षित समेत कई नेताओं ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यूनिवर्सिटी प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर तीन हफ्ते में उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन करेंगे। इस दौरान एलयू छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी मनोज तिवारी, सरोज तिवारी, रविदास मेहरोत्रा, राजेंद्र चौधरी, राजपाल कश्यप,रमेश दीक्षित भी मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों के हस्ताक्षर वाला मांग पत्र एलयू वीसी व राज्यपाल राम नाईक को भेजा है।
ये हैं पांच मांगें
- छात्रों के जनतांत्रिक अधिकारों को लोकतांत्रिक मान्यता देनी चाहिए एवं विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव कराए जाने की पहल की जाए।
-विश्वविद्यलाय में सभा, सेमिनार, परिचर्चा, सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विषयों पर परिचर्चा कराए जाने पर कोई प्रतिबंध यूनिवर्सिटी प्रशासन न लगाए।
-उन छात्रों को प्रवेश दिया जाए जो मेरिट के अंतर्गत आते हों। दुर्भावना, भेदभाव, राजनीतिक छुआछूत के आधार पर किसी भी प्रकार की कार्रवाही न की जाए।
-गुरुजनों के सम्मान की उपेक्ष न की जाए।
-इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर कुलपति पहल करे। छत्र कुलपति को सम्माने देते हुए आगे बढ़ें।
'काले झंडे दिखाना गैर लोकतांत्रिक नहीं'
सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव व एलयू के पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी अतुल अनजान ने कहा कि सीएम को काले झंडे दिखाना, नारे लगाना कोई गैरलोकतांत्रिक कदम नहीं होगा। उन्होंने भी एलयू में पढ़ाई के दौरान जमकर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट का विरोध किया था लेकिन उस दौरान उन्हें दाखिले से नहीं रोका गया। अतुल अनजान के मुताबिक, पिछले लंबे समय से लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली पर लेख ध्यान दें तो लग रहा है कि एलयू पहले कबूतर खाना और अब जेलखाना बनता जा रहा है। छात्रहितों का हनन किया जा रहा है। जब देश के अन्य विश्वविद्यालयों में चुनाव हो सकता है तो एलयू में क्यों नहीं हो सकते।छात्रों के जनतांत्रिक अधिकारियों की अनदेखी करना लोकतंत्र को बाधित करता है। छात्रों को एडमिशन क्यों नहीं दिया जा रहा है।
पंडित नेहरू को भी दिखाए थे काले झंडे
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि अगर एलयू में छात्र अपनी बात नहीं कर पाएंगे, वैचारिक आधार नहीं तय कर पाएंगे तो आगे की राजनीति क्या होगी। ऐसी स्थिति में अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोकतंत्र की स्थिति क्या है। अगर किसी को झंडा दिखाना अपराध होता तो जनेश्वर मिश्रा इंटर पास हो जाते और मेरे जैसे लोगों को भी डिग्री नहीं मिल पाती। काला झंडा दिखाना संवैधानिक अधिकार है लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए टॉलरेंट होना जरूरी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक को 1958 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में काला झंडा दिखाया लेकिन न ही उनकी गिरफ्तारी हुई और न ही उन्हें एडमिशन देने से रोका गया।
'एडमिशन से क्यों रोका लिखित में नहीं मिला जवाब'
इस दौरान छात्रनेता पूजा शुक्ला ने कहा कि उन्हें एडमिशन ने क्यों रोका गया इसका लिखित में कोई जवाब उन्हें नहीं मिला है। अगर केवल काले झंडे दिखाने को लेकर रोका गया है तो ये बात यूनिवर्सिटी प्रशासन लिखकर दे। बता दें कि एडमिशन न मिलने पर पूजा शुक्ला, गौरव त्रिपाठी समेत तमाम छात्रों ने एलयू में धरना दिया था। इसके बाद कुछ पूर्व छात्र व यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के बीच कहा सुनी हुई थी जिसके बाद एलयू में उपद्रव हो गया।
Published on:
11 Jul 2018 02:43 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
