यह दर्द सैफई का है और इसे वहां जाकर बखूबी समझा जा सकता है। आसपास के गांवों में तो लोग चटखारे लेकर सैफई के संघर्ष की चर्चा करते हैं किन्तु सैफई के भीतर, क्या पुरुष, क्या महिलाएं सभी दुखी हैें। मेडिकल यूनविर्सिटी से लेकर हवाई पट्टी तक सहेजे सैफई में समाजवादी पार्टी के शीर्ष पुरुष मुलायम सिंह यादव के घर के आसपास लोग तो हैं किन्तु सन्नाटा पसरा है। कहने को यह गांव है किन्तु यहां ठेले पर सब्जी बेचने वाला दिख जाएगा। वह दरवाजे-दरवाजे जा रहा है किन्तु उसकी सब्जी नहीं बिक रही। एक दरवाजा खटखटाता है तो भीतर से महिमा यादव निकलती हैं और सब्जी नहीं खरीदनी कहकर विदा कर देती हैं। यही स्थिति अन्य घरों के बाहर की भी है। महिमा कहती हैं, कैसे खाना बनाएं। कई दिन से गांव के कई घरों में खाना नहीं बना है। सब दुखी हैं। जो हो रहा है, वह नहीं होना चाहिए। सब एक हो जाएं, तो सैफई सबसे ज्यादा खुश होगी। वे बताने लगती हैं, नेताजी सभी बहुओं को बहुत लाड़ करते हैं। अब वे भी परेशान होंगे। हम सब उन्हें परेशान नहीं देख सकते। वहीं मौजूद सोनू कहते हैं, हर गांव वाला दुखी है। किसी को भूख ही नहीं लग रही। अब तो तभी स्थिति सामान्य होगी, जब सब एक हो जाएंगे। इसके लिए पूजा-पाठ भी किये जा रहे हैं।