लखनऊ.मदर टेरेसा की राह पर शहर के कई स्कूल चल पड़े हैं। स्कूल बच्चों को भी उसी राह पर ले जा रहे हैं जिससे बच्चे दूसरों की मदद करना सीखें। इस काम में राजधानी के कई स्कूल अच्छा काम कर रहे हैं। इन स्कूलों को भले ही सरकार से कोई मदद ना मिलती हो लेकिन चैरिटी के काम में वह आगे हैं।
हम बात कर रहे हैं लॉरेटो कान्वेंट स्कूल, क्राइस्ट चर्च, लाल बाग गर्ल्स डिग्री कॉलेज की। यहां बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ ही नैतिकता का पाठ भी पढ़ाया जाता है।
केथेड्रल स्कूल की प्रिंसिपल मेल्विन सल्डाना ने कहा मदर टेरेसा के लिए शिक्षा एक ऐसा हथियार थी जो समाज को बदलने की ताकत रखती थीं। आज उनकी राह पर कई स्कूल चल रहे हैं। शहर के कई स्कूलों का सञ्चालन सिर्फ समाज के लिए किया जा रहा है। इन स्कूलों में बच्चों को भी शिक्षा के साथ सेवा भाव सिखाया जाता है।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज की प्रिंसिपल राकेश चत्री ने बताया की बच्चों को समाजसेवा का भाव पढ़ाया नहीं जाता। यह उनकी आदत में शुमार किया जाता है। इसी मिशन के साथ हमारे कॉलेज की शुरुवात हुई थी। देश पर कोई मुसीबत आती है तो हमारे बच्चे आगे आते हैं।
लखनऊ के कॉलेज से है मदर का खास रिश्ता मॉल एवेन्यू स्थित लॉरेटो कान्वेंट कॉलेज लखनऊ की शान है। मदर टेरेसा आयरलैंड से जब भारत आईं तो उन्होंने कोलकाता के लॉरेटो कॉन्वेंट में 1929 में पढ़ाना शुरू किया था। इस स्कूल की ब्रांच लखनऊ के हज़रतगंज में भी है।
इस स्कूल की नींव साल 1872 में लॉरेटो नन्स ने रखी थी। मकसद था शहर के बच्चों को बेहतर शिक्षा देना। यह कोशिश भी थी की वंचित घरों के बच्चों को भी पढ़ने का मौक़ा मिले। इसलिए आज भी यहां सामान्य परिवारों की बेटियों के साथ गरीब बच्चियों को बिना फीस की तालीम दी जाती है। स्कूल परिसर में बच्चियों के लिए विशेष स्कूल चलाये जाते हैं।
लालबाग गर्ल्स कॉलेज लालबाग गर्ल्स स्कूल की शुरुआत सिर्फ किताबी ज्ञान के लिए नहीं बल्कि इसका मकसद बच्चियों को समाज में आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। शहर में प्राइवेट स्कूलों की संख्या काफी अधिक है इसके बावजूद माता-पिता अपनी बेटियों को यहां पढ़ने भेजते हैं। प्रिंसिपल सपना लेबर्न ने बताया की उनके स्कूल में लड़कियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया जाता है। बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय स्कूल की लड़कियां बड़ा योगदान देती हैं।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज भी कर रहा है काम क्राइस्ट चर्च कॉलेज 1878 में शुरू हुआ था। यहां दृष्टिबाधित स्टूडेंट के लिए विशेष क्लास लगती है। यहां स्कूल के बच्चे कई सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।