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यूपी में छोटे दलों का अस्तित्व खतरे में, सपा पर लग रहे आरोप

समाजवादी पार्टी का प्रयास है कि आने वाले चुनाव में सपा ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरे। इसके लिए जरूरी है कि दो और चार सीटें जीतने वाले दल भी उसके साथ हों।

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Raghvendra Pratap

Jun 23, 2016

Akhilesh yadav Mulayam Singh yadav Shivpal Yadav

Akhilesh yadav Mulayam Singh yadav Shivpal Yadav

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विकास के मुद्दे पर 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ रही समाजवादी पार्टी पर सूबे के छोटे दलों का अस्तित्व खत्म करने का आरोप लगने लगा है। यूपी की सियासत को करीबी से जानने वालों की मानें तो समाजवादी पार्टी का प्रयास है कि आने वाले चुनाव में सपा ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरे। इसके लिए जरूरी है कि दो और चार सीटें जीतने वाले दल भी उसके साथ हों। अपनी इसी रणनीति के तहत वो छोटे दलों में तोड़-फोड़ कर उन्हें अपने साथ जोड़ रही है। इसकी एक झलक हाल ही में हुए राज्यसभा और विधानपरिषद के चुनाव में भी देखने को मिला। जिसमें सपा ने क्रास वोटिंग के जरिये छोटे दलों के साथ बड़े दलों के मत भी हासिल किए।

अयूब ने सपा पर लगाया पीस पार्टी को तोड़ने का आरोप
क्रास वोटिंग करने वाले भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव को तो समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर ग्रामीण सीट से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। इसके पहले मात्र चार विधायकों के दल डॉ. अयूब की पीस पार्टी के तीन विधायकों को भी तोड़ने का सपा पर आरोप है। पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ अयूब ने विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय से लिखित शिकायत देकर अपने तीनों बागी विधायक सदस्यता खत्म करने की मांग की है।

सपा ने पीस पार्टी के विधायक को दिया टिकट
जिसमें मुरादाबाद की कांठ सीट से विधायक अनीसुर्रहमान, रायबरेली की सदर सीट से विधायक अखिलेश प्रताप सिंह, सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज सीट से विधायक मलिक कमाल युसूफ की सदस्य्ता समाप्त करने की मांग की है। इसमें समाजवादी पार्टी ने मलिक कमाल युसूफ को डुमरियागंज से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है।

कौमी एकता दल का सपा में हुआ विलय
इससे पहले मंगलवार को माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो चुका हैं। एक दिन पहले बसपा से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्या के भी सपा से जुड़ने की चर्चा गर्म है। सपा गुणा गणित में लगी है कि स्वामी को जोड़ने से उसे कितना लाभ होगा। सपा को बहुत करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र उत्तम का कहना है चुनाव को देखते हुए सपा पूरब में अपने को मजबूत कर लिया है। अब पउिसके निशाने पर चैधरी अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल है। अपनी इस रणनीति में सपा को कितनी कामयाबी मिलेगी यह भविष्य के गर्भ में है।

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