
न इतने पैसे हैं, न तो हर बार बाजार जा सकते हैं…
पति से कई बार बाहर से पैड लाने के लिए भी बोला लेकिन मेडिकल स्टोर पर जाकर भी खाली हाथ लौट आए। कहते हैं पैड मांगने में शर्म महसूस होती है...
रिपोर्टर- स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आपको पैड नहीं मिलता? महिलाएं- गांव में कौन देने आता है।
भले ये 3 बयान यूपी की 3 लड़कियों-महिलाओं के हैं। लेकिन यही हालात यूपी के उन 150 गांवों के थे जहां पत्रिका यूपी के 12 रिपोर्टर पहुंचे। आइए आपको ले चलते हैं लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ, सहारनपुर, झांसी, गोंडा, अयोध्या, मुरादाबाद, उन्नाव, मऊ और अल्मोड़ा के 150 गांवों की लड़कियों के कहानियों में…
मेरठ में लड़कियां पीरियड्स में हल्के पैड लगाती हैं
गांव नगला कबूलपुर की संजना पीरियड के दौरान पैड का उपययोग करती हैं। इसी तरह से गांव कपसाढ की सुरभि, गांव हसनपुर की ममता, गांव रछौती की सुनीता, गांव डोरली की संगीता पीरियड के दौरान हाइजीन पैड का उपयोग करती हैं। लेकिन ये सभी हल्के और सस्ते पैड ही गांव की हाट बाजार से खरीदती हैं।
रिपोर्टरः कामता त्रिपाठी, मेरठ से
गोंडा में लड़कियां पीरियड्स आने पर पैड नहीं कपड़े ढूंढती हैं
गोंडा जिले के गांव जगदीशपुर की रजिया खातून, बसभरिया रूपा देवी, कौड़िया गांव की पूनम कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। एक बार उपयोग करने के बाद उसे फेंक देती हैं। कई महिलाओं ने नाम और पता गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि हम लोग शुरू से ही कपड़े का उपयोग करते हैं। हम लोगों के पास इतना पैसा नहीं होता है बाजार से पैड खरीद कर लाया जाए।
यह पूछे जाने पर की स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आपको पैड नहीं मिलता?
लगभग महिलाओं ने एक स्वर में कहा- गांव में कौन देने आता है।
रिपोर्टरः महेंद्र त्रिपाठी, गोंडा से
वाराणसी में पहले लड़कियां कपड़े का टुकड़ा इस्तेमाल करती थीं
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के चौबेपुर की सिंपल शर्मा ने कहा, “मुझे कक्षा 11 में पहली बार पीरियड आया। घर आई तो मां से बताया। मां ने कपड़े के टुकड़े दिए और कहा कि इन दिनों यही इस्तेमाल करना होता है। जब मैंने उसे इस्तेमाल किया तो अजीब लगा। उसे पहनकर कहीं आने जाने में अजीब सा लगता था जैसे कोई भारी सामान रखा हो।” फिलहाल सिंपल बीए कर चुकी हैं। अब वह खुद से पैड खरीदकर लाया करती हैं।
रिपोर्टरः फैज हसनैन, वाराणसी से
लड़कियां-महिलाएं ‘धत्त’ कहकर मुंह फेर लेती हैं, पुरुष आंख दिखाते हैं
उत्तर प्रदेश की प्रथम विधानसभा क्षेत्र बेहट के गांव रायपुर की रहने वाली महिलाओं ने पहले तो पीरियड्स पर बात ही नहीं की। हम गांव पहुंचे तो महिलाओं के लिए इस विषय पर बात करना जैसे टैबू था। वह ‘धत्त’ बोलकर मुंह फेर ले रही थीं। विकल्प न होने पर हमने पुरुषों से बात की तो वो भी आंख दिखाने लगे और मुंह से एक शब्द न बोलते।
मुजफ्फरनगर में घर में पैड आया तो झगड़ा हो गया
मुजफ्फरनगर के अखलोर गांव की बबली बताती हैं, “पहली बार जब घर मे पैड मंगाए तो विवाद हुआ। सास को ये बात अच्छी नहीं लगी कि पैड खरीदकर लाया जाए। अब पति ही लेकर आते हैं, लेकिन छिपाकर।”
रिपोर्टरः शिवमणि त्यागी, सहारनपुर से
प्रयागराज में पति मेडिकल स्टोर तक जाते हैं
प्रयागराज के मेजा तहसील के नेवढ़िया गांव की रितु पांडेय कहती हैं, “मैं गांव में रहती हूं। यहां मेडिकल स्टोर या जनरल स्टोर नहीं है। जरूरत पर कपड़ों का प्रयोग करती हूं। पति से कई बार बाहर से पैड लाने के लिए भी बोला, लेकिन वह संकोच के कारण मेडिकल स्टोर पर जाकर भी खाली हाथ लौट आए। उनका कहना है कि पैड मांगने में शर्म महसूस होती है।”
रिपोर्टरः श्रीकृष्ण राय, प्रयागराज से
लखनऊ में लड़कियों का पैड महंगा पड़ रहा है
रामपुर बेहड़ा ग्राम पंचायत के सरैया बाजार में गरीब लाल अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह प्राइवेट शिक्षक हैं। उनके परिवार में पत्नी सुषमा बेटा राम मिलन, अनिल, प्रदीप, बेटी अंशु, अंजली हैं। अंशु बीकेटी इंटर कॉलेज में 12वीं की छात्रा और उसकी छोटी बहन अंजली कक्षा 10 की छात्रा हैं। अंजली ने बताया कि उसे जब पीरियड आते थे, तो मम्मी घर में अचार नहीं छूने देती थी, ना ही मंदिर में पूजा करने देती थी। दूर रहने के लिए हमेशा बोलती रहती थीं। अंशु ने कहा कि हमेशा हीन भावना सी मन में रहती थी। हलांकि बीते कुछ महीनों से हालात बदले हैं। अब मैं पूजा करने लगी हूं।”
रिपोर्टरः रितेश सिंह, लखनऊ से
मऊ की लड़कियां कपड़े के टुकड़े से माहवारी का खून रोकती हैं
“मैं पीरियड के दौरान कपड़े का उपयोग करती हूं। न इतने पैसे हैं, न तो हर बार बाजार जा सकते हैं, इसलिए कपड़े को साफ धोकर उसका इस्तेमाल कर लेते हैं। कभी-कभार मिल गया तो डिटॉल डालकर धो लेती हूं।” ये बात हमसे मऊ के खंडेरायपुर नेवादा गांव की नीतू ने कही। करीब-करीब यही बात हमसे बस्ती गांव की पूनम और सोनी ने, महराबंधा की आभा ने भी कही। सलाहबाद की श्रुति माहवारी के लिए रुई और बैंडेज का इस्तेमाल करती हैं।
रिपोर्टरः अभिषेक सिंह, मऊ से
झांसी में मायके रहने दौरान लड़कियां खुद पैड खरीद लेती हैं
झांसी के काशीपुरा गांव की सरोज कहती हैं, “जब मैं मायके में थी तब पैड इस्तेमाल करती थी, लेकिन शादी के बाद से कपड़ा इस्तेमाल कर रही हूं। कभी-कभी तो उसी कपड़े को धो कर दोबारा से इस्तेमाल करना पड़ता है। मऊरानीपुर की रहने वाली रिहाना कहती है कि हमारे यहां सभी कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। कई बार इंफेक्शन हो जाता है। दवा भी करवानी पड़ती है।”
रिपोर्टरः राम नरेश यादव, झांसी से
अयोध्या की लड़कियां माहवारी में कपड़ा लगाने पर मजबूर
अयोध्या के बीकापुर तहसील के गांव देवसियापारा की गुलाबा से जब इस बारे में बात करने की कोशिश की तो पहले तो वे कुछ कहने को तैयार नहीं हुईं, पर हमारे साथ गईं आशा बहू किरण ने जब उन्हें समझाया तो उन्होंने काफी संकुचित भाव से कहा, “वे चाहती तो हैं कि पीरियड के दौरान उनकी बेटी और बहू सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करें। पर चाहकर भी इस कार्य मे गरीबी आड़े आ जाती है। इसलिए कपड़ा ही एकमात्र सहारा है।”
रिपोर्टरः राहुल मिश्रा, अयोध्या से
मुरादाबाद सिटी में महिलाएं पैड ला रही हैं
मुरादाबाद के समाथल गांव की नेहा प्रजापति ने बताया कि पीरियड्स के दौरान वह अच्छी क्वालिटी का पैड इस्तेमाल करती हैं हालांकि, मेरी जानकारी में बहुत सी महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती हैं जबकि, कपड़े के इस्तेमाल से बीमारियों का खतरा बना रहता है।
रिपोर्टरः मोहम्मद दानिश, मुरादाबाद से
उन्नाव में महिलाएं एक ही सैनिटरी पैड कई बार इस्तेमाल करती हैं
उन्नाव के आदर्श नगर निवासी नीलम सिंह कहती हैं, “गांव में अभी भी एक ही सेनेटरी पैड का कई बार इस्तेमाल होता है। कपड़े का भी प्रयोग किया जाता है। क्योंकि परिवार के लोग कई बार कहने पर एक बार लाते हैं। विवाहित या फिर अविवाहित महिला हो सभी में इंफेक्शन होता है। इंफेक्शन का असर शरीर के अंगों पर भी पड़ता है।”
रिपोर्टरः नरेंद्र अवस्थी, उन्नाव से
प्रधानमंत्री जन आरोग्य केंद्र पर मिलते हैं 1 रुपए में पैड
सरकार ने यूपी में बड़ी संख्या में जन औषधि या जन आरोग्य केंद्र खोले हुए हैं। यहां पर 1 रुपए में पैड मिलते हैं। हालांकि इनकी संख्या अभी गांवों की तुलना में 3 गुने या इससे ज्यादा कम है।
| जिले | जन औषधि केंद्र | गांव |
| लखनऊ | 93 | 809 |
| प्रयागराज | 26 | 3084 |
| वाराणसी | 62 | 1341 |
| मेरठ | 84 | 660 |
| सहारनपुर | 39 | 1577 |
| गोंडा | 17 | 1821 |
| अयोध्या | 20 | 1267 |
| मुरादाबाद | 24 | 1166 |
| झांसी | 20 | 821 |
सोर्स (जन औषधि केंद्र): http://janaushadhi.gov.in/KendraDetails.aspx
सोर्स (गांव): https://www.viewvillage.in/
अब बाजार में सैनिटरी पैड बेचने वाली कंपनियों की कीमतें
| सैनिटरी पैड बेचने वाली कंपनियां | पर पैक कीमत |
| Whisper | ₹30 |
| Stayfree | ₹35 |
| Carefree | ₹70 |
| Paree | ₹32 |
| Sofy | ₹29 |
| Nine | ₹40 |
| Nua | ₹166 |
*औसतन एक पैक में 6 से 10 सैनिटरी पैड होते हैं
यूपी की 70% लड़कियों ने कहा- सैनिटरी पैड खरीदने में सक्षम नहीं
अमरीकी सरकार से सहायता प्राप्त नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नॉली इंफॉर्मेशन के https://www.ncbi.nlm.nih.gov/ रिसर्च पेपर के मुताबिक, यूपी में 70% लड़कियों का कहना है कि उनके परिवार सैनिटरी पैड्स को खरीदने में सक्षम नहीं हैं, और 88% सैनिटरी पैड्स के रूप में घरेलू वस्तुओं जैसे कपड़ा या घास का इस्तेमाल करते हैं।
आंकड़े और जानकारी संजना सिंह ने संकलित की है।
Published on:
07 Nov 2023 06:33 pm
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