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शिवभक्त के नाम पर ट्रोल हो रहे राहुल गांधी के समर्थन में आया ये संन्यासी, गरीबों के लिए किया यह काम

शिवभक्त के नाम पर ट्रोल हो रहे राहुल गांधी के समर्थन में आया ये संन्यासी, गरीबों के लिए किया यह काम

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Oct 05, 2018

rahul gandhi

शिवभक्त के नाम पर ट्रोल हो रहे राहुल गांधी के समर्थन में आया ये सन्यासी, गरीबों के लिए किया यह काम

लखनऊ. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बीजेपी भले ही कितना भी नजरअंदाज क्यों न करे, लेकिन दिन पर दिन उनकी बढ़ रही लोकप्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आपने तमिलनाडु की लोकप्रिय मुख्यमंत्री जयललिता के नाम से चलने वाली अम्मा कैंटीन के बारे में सुना होगा, लेकिन ऐसी ही एक कैंटीन अब उत्तर प्रदेश के उन्नाव में खुल गई है। जी हां... उन्नाव से रायबरेली जाते वक्त रास्ते में सडक़ के किनारे आपको ‘राहुल गांधी’ कैंटीन दिखाई देगी। इस कैंटीन को एक संन्यासी बाबा चला रहे हैं। वह इस कैंटीन में गरीबों को मुफ्त में खाना खिलाते हैं। जो लोग इच्छा से पैसे देना चाहते हैं, वही देते हैं। वह बताते हैं कि करीब 150 लोग उनकी कैंटीन में हर रोज खाना खाते हैं।


राजू बाबा नाम के शिवभक्त ने तीन हफ्ते पहले यह कैंटीन शुरू की थी। वह खुद को जूना अखाड़े का नागा साधु बताते हैं। इस कैंटीन का नाम राहुल गांधी के नाम पर कैसे पड़ा, इस बारे में वह बताते हैं कि हम शिव भक्त हैं। राहुल गांधी भी शिवभक्त हैं, तो हम गुरु भाई हुए। भगवान दूसरों के माध्यम से काम-काज करते हैं। आज के युग में राहुल गांधी की बात ठीक है, सबको मिल-जुलकर रहना चाहिए और मिल-बांटकर खाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वह अमरनाथ यात्रा और कैलास मानसरोवर को जाने वाले लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं। कहा कि मैंन राहुल गांधी के लिए भी प्रार्थना की लेकिन विपक्ष ने उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। मुझे बुरा लगा और राहुल के लिए भाईचारे की भावना जागी। मुझे लगा कि एक मुफ्त कैंटीन शुरू करनी चाहिए। राजू बाबा के मुताबिक देश सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। ऐसा वक्त 40 साल से नहीं आया था। उन्होंने कहा, 'यह सब अच्छे दिन के सपनों के साथ चार साल पहले शुरू हुआ लेकिन अच्छे दिन तो भूल जाइए, जिंदगी की गुणवत्ता खराब हो गई है। लोग संपत्ति बेचकर जीवन बिता रहे हैं।' उन्होंने बताया कि 6 साल पहले उनके गांव में 8000 लोग थे लेकिन नौकरी की कमी की वजह से परिवार पलायन करने लगे हैं। घर के बड़े पीछे छूट गए हैं। उनमें से कुछ को वह मुफ्त में खाना खिलाते हैं।

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