
किसानों को MSEB नियम की नहीं जानकारी
बहुत से यूपी के किसानों को नियमों की जानकारी नहीं है। ऐसे किसानों को मुआवजा नहीं मिलता है। कुछ किसानों को नियम MSEB की जानकारी तो है, लेकिन उन्हें कैसे लाभ लेना है, इसकी जानकारी नहीं है। किसानों को MSEB से कनेक्शन लेना होता है। अप्लाई की तारीख से तीस दिनों के अंदर किसान को कनेक्शन होना चाहिए। नहीं मिलने पर कानून कहता है कि किसानों को हर सप्ताह 100 रुपये मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही ट्रांसफार्मर में कोई फॉल्ट है तो कंपनी 48 घंटे के अंदर आपको ट्रांसफार्मर ठीक करके देगी। अगर ऐसा नहीं किया तो (MSEB) एक्ट के तहत 50 रुपये मुआवजा मिलेगा।
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 57 में एक नियम बना। जिसके अनुसार किसानों को कंपनी के मीटर (MSEB) पर निर्भर रहने के स्थान पर अपना खुद का स्वतंत्र मीटर (MSEB) लगाने का अधिकार दिया जाया था। कंपनी मीटर और घर (MSEB) के बीच केबल का खर्च भी देती है। ग्राहक नियम और शर्तों में शर्त संख्या 21 यह बताती है।
किसानों को 2000 रुपये से 5000 रुपये की बिजली मिलती है
उसके बाद अगर नया बिजली कनेक्शन (MSEB) यानी घरेलू कनेक्शन लेना हो तो पंद्रह सौ रुपये और कृषि पंप के लिए पांच हजार रुपये पोल और अन्य खर्चे भी कंपनी इस कानून के मुताबिक करती है। डीपी और पीओएल मिलकर किसानों को प्रति माह 2000 रुपये से 5000 रुपये की बिजली मिलती है। बहुत किसानो को इसकी जानकारी नहीं है।
गर कोई कंपनी बिजली को एक खेत से दूसरे खेत (MSEB) तक पहुंचाना चाहती है, तो उसे स्टेशनों, ट्रांसफार्मर, डीपी और खंभों को भी जोड़ना होगा। तो इस जमीन का किराया प्राप्त करने के लिए (MSEB) कंपनी किसानों (MSEB) के साथ जमीन का किराया समझौता करती है और उसके तहत किसानों को दो से पांच हजार रुपये मिलते हैं। अगर आप बिजली कंपनी को अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC सर्टिफिकेट दिया है तो आप उस कंपनी से किराया नहीं वसूल सकते है।
Published on:
22 May 2023 09:01 am
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