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भाई ने बचाया बहन का सुहाग, डोनर के लिवर का 40 फीसदी हिस्सा किया मरीज को ट्रांसप्लांट

लखनऊ के आलमबाग निवासी पवन तिवारी ने अपनी बहन के सुहाग को बचाने के लिए जीजा को अपना लिवर डोनेट किया

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भाई ने बचाया बहन का सुहाग, डोनर के लिवर का 40 फीसदी हिस्सा किया मरीज को ट्रांसप्लांट

लखनऊ. कहते हैं भाई बहन का रिश्ता अटूट होता है। यह सिर्फ कहनेभर की बात नहीं है। लखनऊ के आलमबाग निवासी पवन तिवारी (35) ने अपनी बहन के सुहाग को बचाने के लिए जीजा को अपना लिवर डोनेट किया। केजीएमयू में यह दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट रहा जिसमें तकरीबन 11 घंटे लगे। लगभग 50 डॉक्टरों की टीम ने यह ऑपरेशन किया।

नवीन बाजपेयी (45) लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। उनके लिवर को काफी नुकसान हो चुका था। केजीएमयू के प्रो. शंखनाद के अनुसार दो हफ्ते पहले मरीज को भर्ती किया गया था। हालांकि, अस्पताल में पहले से ही उनकी जांच चल रही थी। मरीज के पेट में पानी भर गया था और पीलिया की भी शिकायत थी। दिनोंदिन उनकी हालत गंभीर होती जा रही थी। जांच के बाद निर्णय लिया गया कि मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट किया जाना है। सुबह पांच बजे ऑपरेशन शुरू हुआ जो कि दोपहर चार बजे तक चला। इस ऑपरेशन में करीब 8 लाख का खर्च आया।

डॉक्टर के मुताबिक ट्रांसप्लांट में नियर ब्लड रिलेशन को लिया जाता है। इसलिए पहले पत्नी का लिवर लेने की तैयारी थी। लेकिन पत्नी के भाई का लिवर ज्यादा हेल्दी पाया गया। इसलिए डॉक्टर्स ने पवन तिवारी का लिवर मरीज नवीन बाजपेयी को डोनेट करना ज्यादा सही समझा।

दिल्ली के डॉक्टरों के साथ मिलकर किया ऑपरेशन

मरीज की मार्च से ही केजीएमयू में जांच चल रही थी। उनका गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग की ओपीडी में इलाज चल रहा था। लिवर डैमेज होने पर उन्हें ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई। इसके बाद क्लिनिकल पैथोलॉजी जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। इलाज से 10 दिन पहले मरीज को वार्ड में भर्ती किया गया। पांच दिन तक मरीज को प्रोटोकॉल में रखा गया। इसके बाद दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल के मरीजों के साथ मिलकर उनका लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।

40 फीसदी लिवर का हिस्सा किया ट्रांसप्लांट

डॉक्टर के मुताबिक नवीन के डोनर पवन के लिवर का राइट लोब हिस्सा निकाला गया। इसमें उनके 40 फीसदी लिवर का हिस्सा प्रिजर्व कर नवीन को ट्रांसप्लांट किया गया। हालांकि, ट्रांसप्लांट से पहले सात विभागों से क्लीयरेंस ली गई। इनमें ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, कार्डियोलॉजी व एनेस्थीसिया विभाग शामिल हैं। चिकित्सकों की टीम ने डोनर और मरीज की विभिन्न जांचें कर एचएलए मैचिंग भी कराई। इसके बाद ट्रांसप्लांट को हरी झंडी दी गई। 11 घंटों के ऑपरेशन के बाद मरीज और डोनर दोनों ही स्वस्थ हैं और उन्हें आईसीयू में डॉक्टर की निगरानी में रखा गया है।

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ऑपरेशन में ये डॉक्टर रहे शामिल

मरीज नवीन बाजपेयी के लिवर ट्रांसप्लांट में सर्जिकल गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मोहम्मद परवेज, डॉ. अनीता मलिक, डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. एहसान, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. अमिता जैन, डॉ. प्रशांत, डॉ. शीतल वर्मा, रेडियोलॉजी विभाग से डॉ. नीरा कोहली, डॉ. अनित परिहार, डॉ. रोहित, ट्रांसफ्यूजन विभाग से डॉ. तुलिका चंद्रा और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन शंखवार शामिल रहे। वहीं दिल्ली के मैक्स हास्पिटल के डॉ. सुभाष गुप्ता की टीम में डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल एवं अन्य सर्जन शामिल रहे।

14 मार्च को पहले लिवर प्रत्यारोपण

इससे पहले 14 मार्च को केजीएमयू में पहला लिवर प्रत्यारोपण किया गया था। रायहरेली निवासी अमरेंज्र बहादुर का लिवर प्रत्यारोपण किया गया था। इसमें डॉक्टरों ने मरीज की पत्नी का 60 फीसदी लोब निकालकर ट्रांसप्लांट किया था।

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