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SGPGI डॉक्टर ने बनाया विश्व का सबसे छोटा लेरिंगोस्कोप, गंभीर मरीजों की बचायेगा जान

वीडियो लेरिगोस्कोप के उपरी सिरे पर एक कैमरा तथा प्रकाश के लिए एलईडी लगाया गया है, जिससे अंदरूनी हिस्से की छवि ली जा सके।

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Rohit Singh

Mar 10, 2016

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लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के सहायक प्रो. आशीष कुमार कनौजिया ने 'स्मार्टफोन कॉम्प्टीबल वीडियो लेरिंगोस्कोप’ नाम का पेटेंट लॉन्च किया है। वीडियो लेरिंगोस्कोप विश्व का सबसे छोटा स्मार्ट फोन से जुड़ने वाला पहला लेरिगोस्कोप है। यह उपकरण उन मरीजों के लिए उपयुक्त होगा जिनकी सांस की नली का अंतर्ज्ञान किया गया है। इसके अलावा आईसीयू में भर्ती अति गंभीर मरीजों के वायु मार्ग की रक्षा एवं वेंटीलेटर सहायता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डॉ. आशीष 16 मार्च को राष्ट्रपति भवन में अपने नये पेटेंट पर चर्चा करेंगे।

ashish kanaujia

वीडियो लेरिगोस्कोप के उपरी सिरे पर एक कैमरा तथा प्रकाश के लिए एलईडी लगाया गया है, जिससे अंदरूनी हिस्से की छवि ली जा सके। यह उपकरण कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट फोन, एमपी4 इत्यादि से जोड़ा जा सकता है, जिसे तारों अथवा वायरलेस संप्रेषण जैसे वाई-फाई से भी छवि को स्क्रीन पर देखा जा सकता है। इस उपकरण को इंटरनेट से भी जोड़ा जा सकता है। इंटरनेट से जुड़ने से सजीव छवि एवं वीडियो को संप्रेषित कर विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा सकते हैं।

यह उपकरण चिकित्सा शिक्षण एवं प्रशिक्षण के लिए भी बहुत उपयुक्त रहेगा। इससे प्रशिक्षक अपने स्मार्ट फोन अथवा कंप्यूटर पर देखकर उचित चिकित्सीय निर्देश भी दे सकते हैं। वहीं रिकॉर्डिंग भी की जा सकती है। वीडियो लेरिगोस्कोप से रिकॉर्ड किए गए छवियों एवं वीडियो का टेलीमेडिसिन से सजीव प्रसारण किया जा सकता है। यह विश्व का सबसे छोटा वीडियो लेरिंगोस्कोप रोगी सेवा, चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण के लिए भी उपयोगी है।

अब तक 15 पेटेंट किए दर्ज

डॉ. आशीष कुमार कनौजिया ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर में सन् 1999 में एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद केजीएमयू से 2005 में एमडी एंसथीसिया के बाद पीजीआई तथा एम्स नई दिल्ली से सीनियर रेजीडेंसी की है। 2013 से एसजीपीजीआई में कार्यरत हैं। उन्होंने अब तक 15 पेटेंट दर्ज किए हैं जिसमे से एक पेटेंट इपीडूरल डिटेक्शन डिवाइस (इपीस्योर) बाजार में उपलब्ध है। डॉ. कनौजिया ने अपना पहला पेटेंट 2004 में एमडी करते हुए दर्ज किया था।

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