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अंतिम वक्त में बात बिगड़ी, Shivpal रूठकर अपने घर में कैद, Mulayam भी नहीं जाएंगे आगरा

Samajwadi Rashtriya Adhiveshan जाने को राजी हुए, 30 मिनट बाद फिर रुठ गए, Mulayam भी नहीं जाएंगे आगरा

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लखनऊ

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Alok Pandey

Oct 05, 2017

shivpal Singh Yadav, Mulayam Singh Yadav, Akhilesh Yadav, Samajwadi Parti, Agra Adiveshan

लखनऊ. कुनबे में सुलह की कोशिश अंतिम समय में चकनाचूर हो गईं। परिवार के मुखिया की सलाह पर Shivpal Singh Yadav ने अपनी नाराजगी को खत्म करते हुए Akhilesh Yadav को अपना नेता मान लिया था, और आगरा जाने के लिए निकल पड़े थे। राह में बागी नेता नारद राय भी साथ थे। अचानक रास्ते में कुछ हुआ और Amausi Airport पहुंचने से पहले शिवपाल ने अपनी कार को यू-टर्न लेने के लिए कह दिया। एयरपोर्ट से लौटने के बाद शिवपाल ने मुलायम सिंह को अपने फैसले की जानकारी देकर खुद को सरकारी आवास पर कैद कर लिया है। शिवपाल के फैसले से खिन्न होकर मुलायम सिंह यादव ने भी आगरा जाने का प्लान रद्द कर दिया है। मुलायम ने फोन पर अखिलेश को यशस्वी होने का आशीर्वाद देकर विवशता जताई है। इसी के साथ सैफई के कुनबे के एक होने की संभावना खत्म हो गई है। मुलायम और शिवपाल को लेने के लिए तेजपाल सिंह यादव चाटर्र प्लेन लेकर अमौसी पहुंच गए थे, लेकिन अंतिम वक्त में किसी मुद्दे को लेकर शिवपाल ने खेल बिगाड़ दिया। सूत्रों के मुताबिक, परिवार और पार्टी की एकता के बाद शिवपाल को राष्ट्रीय महासचिव का पद नहीं मिलने की आशंका थी, इसलिए वह राष्ट्रीय अधिवेशन में इसका ऐलान करना चाहते थे, जोकि संभव नहीं होने पर उन्होंने खुद को कोप भवन में बंदकर लिया।

गुरुवार की सुबह राजी, दोपहर में फिर रुठे

सैफई के पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, एक सप्ताह पहले Mulayam Singh Yadav ने परिवार के लोगों को दो टूक कह दिया कि यह आखिरी कोशिश है। अब बात नहीं बनेगी तो वह राजनीति और परिवार से दूरी बना लेंगे। मुलायम की इस वेदना को डिंपल ने महसूस किया और उन्होंने अखिलेश को पिता के सामने झुकने के लिए राजी किया था। इसी के बाद बीते सप्ताह सपा के सुल्तान National Convention का न्योता देने लखनऊ में पिता के सरकारी निवास पर पहुंचे। पिता-पुत्र में पार्टी का वजूद बचाने पर चर्चा हुई और मुलायम ने समझौते का फार्मूला सुझाया, जिसे अखिलेश ने स्वीकार कर लिया। इसी के बाद मुलायम ने परिवार को एकजुट करने का प्रयास शुरू किया। मंगलवार की रात उन्होंने छोटे भाई शिवपाल यादव तथा परिवार के अन्य राजनीतिक सदस्यों के साथ टेलीफोनिक चर्चा करते हुए आदेश सुना दिया कि अब कोई किसी के खिलाफ नहीं बोलेगा। इसके बाद बुधवार को दोपहर में मुलायम ने शिवपाल को अपने आवास पर बुलाकर तीन घंटे तक समझाया, लेकिन शिवपाल agra National Convention में जाने को तैयार नहीं हुए। ऐसे में मुलायम ने नाराजगी जताते हुए उन्हें जाने को कह दिया था। गुजरी रात में मंथन और राजनीतिक भविष्य की संभावनाओं को टटोलने के बाद शिवपाल सिंह ने गुुरुवार की सुबह बड़े भाई मुलायम को फोन लगाकर क्षमा मांगी। इसके बाद मुलायम ने उन्हें अपने आवास पर फिर बुलाया। मुलाकात करने के लिए शिवपाल यादव अपने साथ नारद राय को लेकर पहुंचे। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में टिकट कटने पर नारद राय बागी बनकर बसपा में चले गए थे, लेकिन सात महीने बाद ही बसपा को अलविदा कह दिया। मुलायम सिंह से मुलाकात के बाद शिवपाल सिंह अमौसी एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते से लौट आए।

बधाई संदेश के साथ रिश्तों से बर्फ पिघली थी

बहरहाल, गुरुवार की सुबह अखिलेश को नेता मानने के लिए राजी होने से पहले बुधवार की सुबह शिवपाल ने मुलायम सिंह की सलाह पर अमल करते हुए अखिलेश यादव को फोन पर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की अग्रिम बधाई देते हुए पांच मिनट संवाद किया था। उस दौरान अखिलेश ने अपने चाचा को राष्ट्रीय अधिवेशन में आने का न्योता दिया, लेकिन शिवपाल ने रजामंदी का स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद मुलायम सिंह को बातचीत का ब्योरा देकर अखिलेश यादव आगरा अधिवेशन के लिए निकल गए थे। अखिलेश से बात होने के बाद मुलायम ने शिवपाल सिंह को अपने बंगले बुलाकर तीन घंटे तक समझाया। सूत्रों के मुताबिक, मुलायम ने खुद के राष्ट्रीय अधिवेशन में जाने का इरादा जताकर शिवपाल से भी आगरा पहुंचने को कहा, लेकिन शिवपाल ने आगरा जाने से इंकार कर दिया था।

समझौते में शिवपाल को महासचिव पद मिलना तय था

मुलायम के फार्मूले के मुताबिक, अखिलेश चाहे तो उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद सौंपकर स्वयं कार्यकारी अध्यक्ष बन सकते हैं। अहम फैसलों के लिए कार्यकारी अध्यक्ष को जिम्मेदारी देने के लिए पार्टी संविधान को बदलने का सुझाव भी दिया था। मुलायम ने यह भी सुझाव दिया कि वह कोई पद नहीं चाहते हैं, लेकिन शिवपाल को राष्ट्रीय राजनीति में समायोजित करते हुए महासचिव का पद दिया जाना चाहिए। पिता के इस फार्मूले से अखिलेश यादव सहमत थे। यूपी की राजनीति में शिवपाल का दखल खत्म होने से अखिलेश को राहत ही मिलेगी, लेकिन रामगोपाल यादव को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं था। बहरहाल, समझौते के अंतिम फार्मूले के अनुसार, रामगोपाल और शिवपाल यादव राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका में रहना था। शिवपाल चाहते थे कि राष्ट्रीय अधिवेशन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाने का ऐलान किया जाए। मुलायम ने उन्हें आश्वस्त किया था, लेकिन अमौसी एयरपोर्ट पहुंचने से पहले किसी से बातचीत के दौरान शिवपाल को मालूम हुआ कि घोषणा फिलहाल नहीं होगी। ऐसे में उन्होंने एकता की कोशिश को ठुकराकर अपना फैसला बदल लिया।