
प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से जेड श्रेणी की सुरक्षा सरकार ने वापस ले है। इसके बाद सरकार की अब नजर उनके बंगले पर है। राज्य संपत्ति विभाग में शिवपाल यादव के बंगला आवंटन की फाइल का निरीक्षण करना शुरू कर दिया है।
साल 2018 में जब शिवपाल सिंह यादव ने सपा से नाराज होकर अपनी अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना ली। तब सरकार ने उनकी जान की खतरा को देखते हुए उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी। उसके कुछ दिनों के बाद सरकार ने लाल बहादुर शास्त्री मार्ग का 6 नंबर आलीशान बंगला भी शिवपाल के नाम पर एलॉट कर दिया था। बाद में यही बंगला प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का कार्यालय बन गया।
शनिवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा है कि अगर कोई विधायक सरकारी आवास में कार्यालय चलाता है तो वह गलत है। अगर शिवपाल सिंह यादव इस मामले में गलत होंगे तो उस पर विचार किया जाएगा।
राष्ट्रपति चुनाव के समय दोनों के बीच बढ़ी दूरियां
साल 2018 से 2022 तक शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों एक दूसरे के खिलाफ बयान कर रहे थे। बाद में 2022 विधानसभा चुनाव के समय दोनों एक साथ आ गए और साथ में चुनाव लड़े लेकिन सरकार नहीं बना सके। चुनाव के नजीते आने के बाद दोनों के बीच फिर से दूरियां दिखने लगी। ये दूरियां खुलकर तब सामने आईं जब राष्ट्रपति चुनाव में सपा ने यूपीए उम्मीदवार समर्थन किया और शिवपाल ने एनडीए उम्मीदवार का। कुछ दिन बाद भतीजे अखिलेश ने एक पत्र जारी करके कहा कि चाचा चाचा स्वतंत्र हैं जहां जाना हो वहां जा सकते हैं।
मुलायम के निधन के बाद साथ आए अखिलेश और शिवपाल
सपा संरक्षक मुलायम सिंह के निधन के बाद फिर दोनों नेताओं एक साथ आए। शिवपाल सिंह यादव मैनपुरी में अपनी बहु डिंपल यादव के लिए प्रचार कर रहे हैं। उनके डिंपल के लिए प्रचार के उतरने के बाद 27 नवंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस के सुरक्षा मुख्यालय ने शिवपाल यादव की सुरक्षा को Z श्रेणी से घटाकर Y श्रेणी कर दिया।
Updated on:
04 Dec 2022 10:08 am
Published on:
04 Dec 2022 10:07 am
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