
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों के नियमों में परिवर्तन पर निर्वाचित प्रबंध कमेटी की जगह अंतरिम प्रबंध कमेटी के गठन के प्रावधान के अध्यादेश का समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जसवंतनगर विधायक शिवपाल सिंह ने विरोध किया है। शिवपाल सिंह यादव का कहना है कि यह अध्यादेश शासन द्वारा सहकारी समितियों के प्रजातांत्रिक स्वरुप को समाप्त करने का सीधा प्रयास है। शिवपाल ने कहा है कि सहकारी निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के बाद सहकारी समितियों के आधारभूत सिद्धांत में परिवर्तन करना सरकार की हताशा प्रदर्शित करता है।
अध्यादेश के खिलाफ कोर्ट जायेंगे शिवपाल
शिवपाल यादव ने कहा कि सहकारी निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार ने समय से सहकारी समितियों के निर्वाचन न करा पाने की विफलता को छिपाने के लिए अध्यादेश के माध्यम से जनता की आवाज को कुचलने का प्रयास किया है। शिवपाल ने कहा है कि विधान मंडल का सत्र आहूत किया जा चुका है। ऐसी दशा में अध्यादेश के माध्यम से नियमों में परिवर्तन राज्य सरकार द्वारा संविधान एवं विधान मंडल की उपेक्षा दर्शाता है। शिवपाल ने कहा कि सरकार ने जल्दबाजी में नियम के खिलाफ औचित्यहीन अध्यादेश जारी किया है। शिवपाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सहकारी समितियों पर कब्जे के लिए यह सब कर रही है। उन्होंने कहा कि वे अध्यादेश के खिलाफ कोर्ट जायेंगे।
भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप
शिवपाल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोऑपरेटिव विभाग में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं लेकिन सरकारी अफसर और मंत्री पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कर सहकारी समितियों में फैले भ्रष्टाचार को रोकने की मांग कर चुके हैं लेकिन किसी अफसर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
Published on:
07 Dec 2017 05:57 pm
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