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मुलायम फिर पहुंचे सपा कार्यालय, 80 सीटों पर चुनाव के ऐलान के बाद शिवपाल ने कहा दो दिन में लें कोई फैसला

आज लगातार दूसरे दिन भी वे कार्यालय पहुंचे और पार्टी नेताओं व कार्याकर्ताओं से बातचीत की।
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लखनऊ

•

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Abhishek Gupta

•

Aug 31, 2018

Shivpal Mulayam akhilesh

Shivpal Mulayam akhilesh

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव पिछले कुछ दिनों से काफी एक्टिव दिख रहे हैं। गुरुवार को महीनों बाद तो वे सपा कार्यालय पहुंचे। उनका मुख्य कारण कार्यालय में पूर्व सांसद दर्शन सिंह यादव की शोक सभा रखना व सपा को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना था। वहीं आज लगातार दूसरे दिन भी वे कार्यालय पहुंचे और पार्टी नेताओं व कार्याकर्ताओं से बातचीत की।

शिवपाल का 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान-

उधर शिवपाल सिंह यादव ने सेक्युलर मोर्चे के ऐलान के बाद शुक्रवार को एक और धमाका किया। शिवपाल ने आज अपने प्लान को एक कदम और आगे ले जाते हुए यूपी की सभी 80 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया जिससे पार्टी में बगावती तेवर की खबरों को और मजबूती मिल गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी के उपेक्षित लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा जिसमें पार्टी के सबसे सीनियर नेता भी होंगे।

अखिलेश-मुलायम ने नहीं की कोई टिप्पणी-

अखिलेश यादव गुरुवार को पूर्व सांसद दर्शन सिंह यादव की अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो पाए, तो वे शुक्रवार सुबह ही आनन-फानन में वहां पहुंचे और शिवपाल पर किसी भी सवाल के जवाब में ठीक वैसे ही चुप्पी साधे रहे, जैसे पिता मुलायम गुरुवार को पार्टी कार्यालय में साधे हुए थे। मुलामय सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों ही शिवपाल के इस ऐलान से ऊपरी तौर पर अप्रभावित दिख रहे हैं, लेकिन ये खामोशी कहीं आने वाले तूफान की ओर संकेत तो नहीं दे रही है?

वैसे मुलायम ने जिस प्रकार से पार्टी कार्यालय में अखिलेश की तारीफ की, उससे तो यहीं प्रतीत हो रहा है कि वे आगे भी बेटे को ही समर्थन देंगे। वहीं शिवपाल इस कोशिश में हैं कि वो नेताजी को अपने पक्ष में करें। इस खींचातान में यह भी खबर आ रही है कि शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव को दो दिन में कोई फैसला लेने की मोहलत दी है। यह फैसला संभवतः अखिलेश और शिवपाल में से किसी एक को चुनने को लेकर है, लेकिन अंततः मुलायम सिंह यादव को ही फैसला लेना है, जो शनिवार को इस पर अपना बयान दे सकते हैं।

ये सपा लड़ाई पार्ट 2 है?

कुल मिलाकर के यह कहना गलत नहीं होगी कि आर-पार की यह लड़ाई 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव की तरह होती दिख रही है या यूं कहे उस लड़ाई का ये दूसरा भाग है। अखिलेश अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखे हुए हैं जो भाजपा को किसी भी कीमत पर 2019 में हराने का है। तो वहीं शिवपाल पार्टी में खोए मान-सम्मान को वापस पाने व नए मोर्चे के साथ मोदी को हराने की जुगत में लग गए हैं। लेकिन अंत क्या होगा यह कोई नहीं जानता। हां, पूर्व मुख्यमंत्री के शब्दों में यह बात तो तय है कि जनता को चुनाव तक ऐसी कई घटनाएं देखने को मिलती रहेंगी।