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लखनऊ. दुनिया में ऐसी कई बीमारी हैं जो आमतौर पर बच्चों का बचपन बर्बाद कर देती हैं। एक ऐसी ही बीमारी का नाम है 'इक्थियोसिस'। ये वो स्किन कंडीशन है जिसमें बच्चे की स्किन मोम जैसी होती है। ये काफी दुर्लभ बीमारी है। हालांकि, इसके केसेस भारत में कम ही होते हैं और शायद इसी वजह से लोगों में इस जानकारी का अभाव है। इक्थियोसिस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए गौतम गंभीर, फिल्म अभिनेत्री सोहा अली खान व श्रिया सरन और ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट गौरी सावंत ने लखनऊ समेत देश के कई शहरों में एक कैंपेनिंग के जरिये जानकारी दी। यह कैंपेन विक्स ब्रांड के 'विक्स टच ऑफ केयर' की ओर से शुरू किया गया है, जिसमें इक्थियोसिस से पीड़ित एक लड़की पर शार्ट फिल्म दिखाकर लोगों में जागरूकता फैलाने का काम किया गया है।
क्या है इक्थियोसिस बीमारी
इक्थियोसिस वह रेयर स्किन कंडीशन है, जिसमें बच्चे की त्वचा मोम जैसी होती है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, वैसे-वैसे यह बीमारी गंभीर रूप लेती है। इक्थियोसिस बीमारी के शिकार कम ही बच्चे होते हैं। यह लाइलाज बीमारी है। इसमें उपचार के लिए क्रीम, लोशन या मलहम लगाया जाता है। इस बीमारी में बच्चे को सांस लेने में परेशानी भी होती है। यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो जेनेटिक स्किन डिसऑर्डर की वजह से होती है। इस बीमारी में बीच-बीच में बच्चे की स्किन उतरती रहती है जिससे कि काफी दर्द भी होता है। इसमें त्वचा सख्त, बेजान और रूखी होती है। यह जन्म के समय दिखती है और जीवनभर प्रभावित कर सकती है।
इक्थियोसिस के लक्षण
इक्थियोसिस के आम लक्षण हैं सूखी काली स्किन, लालिमा, फफोले या बहुत ज्यादा शेडिंग होती है। इसके अन्य लक्षण होते हैं इक्थियोसिस वुल्गारिस जिसमें हल्कि त्वचा की स्केलिग होती है। एपिडमोर्लिटिक इक्थियोसिस जिसमें त्वचा के ऊपर भूरे रंग की पपड़ी हो।
लखनऊ से चाइल्ड स्पेशलिस्ट शिशिर अग्रवाल कहते हैं कि हालांकि, यह बीमारी कम ही बच्चों को होती है लेकिन यह एक पर्मानेंट स्किन डिसीज है। ऐसे में बच्चे की स्किन की देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है नहीं तो इन्फेक्शन का खतारा बना रहता है। उम्र बढ़ने के साथ ही स्किन उतरती भी रहती है। इसमें हेयर लॉस, आई प्रॉब्लम जैसी कोई भी चीज सबसे ज्यादा प्रभावित भी हो सकती है।
क्या है यह अभियान
विक्स की ओर से यह अभियान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने के संदर्भ में है। निसेफ एस्टिमेट, स्टेट ऑफ वर्ल्डस चिल्ड्रन रिपोर्ट, 2016, सेंट्रल अडॉप्टेशन रिसोर्स अथॉरिटी, इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2,96,00,000 बच्चे अनाथ थे, जिसमें से मात्र 42 बच्चों को गोद लिया गया। इसमें से भी कुछ ऐसे बच्चे रहे, जो इक्थियोसिस नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।
ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट गौरी सावंत ने कहा कि यह अभियान ऐसे लोगों को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा है और उनकी मदद कर रहा है, जो इस दुनिया में असाधारण संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह दुनिया के लिए आशा की एक किरण की तरह है। वहीं गौतम गंभीर ने कहा कि गौतम गंभीर ने कहा कि यह एक ऐसा अभियान है, जिसने दुनिया भर में लाखों दिलों को छुआ है।
Updated on:
10 Oct 2018 04:24 pm
Published on:
10 Oct 2018 03:53 pm
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