
स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कास्ट, हर माह जीएसटी वसूली का विरोध
लखनऊ। उपभोक्ता परिषद ने रेवमप योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के प्रीपेड स्मार्ट मीटर पर कास्ट लागत और हर माह जीएसटी वसूली का जमकर विरोध करते हुए केन्द्र सरकार से कानून में बदलाव का विरोध किए जाने की माग की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन रेवमप योजना के तहत पूरे प्रदेश में सभी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना जिसका टेंडर बिजली कंपनियों द्वारा जारी कर दिया गया है लेकिन एक उसमें सबसे बडा सवाल ये उठता है की उस पर आने वाले खर्च की भरपाई प्रदेश का उपभोक्ता क्यों करेगा ।
केंद्र सरकार की योजना के तहत यदि केंद्र चाहता है कि उपभोक्ताओं के घरों में इस योजना के तहत प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाए तो उसका खर्च वह स्वयं बहन करें उपभोक्ता परिषद केंद्र सरकार की इस उपभोक्ता विरोधी नीति का घोर निंदा करता है और केंद्र सरकार से यह मांग करता है कि वह अपनी नीति में बदलाव करें और इस पर आने वाले खर्च की भरपाई स्वयं उठाएं क्योंकि वर्तमान में उपभोक्ताओं के घरों में जो मीटर लगा है।
उसका मूल्य उपभोक्ताओं ने बिजली का कनेक्शन लेते वक्त दिया है और उसकी गारंटी भी 5 साल की होती है ऐसे में केंद्र सरकार की नीति के तहत उपभोक्ताओं के घर में प्रीपेड स्मार्ट मीटर रूपी कोई भी बदलाव किया जाना और उसका मूल्य उपभोक्ताओं से लिया जाना संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है जिसका उपभोक्ता परिषद हर स्तर पर विरोध करेगा ।
उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा रेवमप योजना के तहत जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट में स्पष्ट रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कुल लागत रुपया 6000 आंकी गई। जिसमे केंद्र सरकार द्वारा रुपया 900 और 5100 बिजली कम्पनियो को खर्च करना है।उसका भार उपभोक्ताओ के वार्षिक राजस्वा आवश्यकता एवं बिजली दर में पास आन करने सहित उपभोक्ताओ के परिसर पर लगने वाले प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कैपिटल कॉस्ट पर ओपेक्स मॉडल में हर माह रुपया 16 से रुपया 20 की लगने वाली जीएसटी का भार भी उपभोक्ताओ के बिजली दर में डाला जाएगा।
यानी बिजली दरों में बड़ा बोझ आने वाले समय में उपभोक्ताओ पर चोर दरवाजे डालने की साजिश है जो उपभोक्ता विरोधी नीति को दर्शाता है। उपभोक्ता परिषद् पहले ही इस पूरे मामले पर प्रदेश के ऊर्जामंत्री को अवगत करा चुका है जिस पर उनके द्वारा कार्यवाही का भरोषा दिया गया था। प्रदेश के अपरमुख्य सचिव ऊर्जा को उपभोक्ता हित में निर्णय कराने के निर्देश दिए गये थे लेकिन उस पर अभी तक कुछ नही हुआ।
उपभोक्ता परिषद जनहित में प्रदेश सरकार पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन से यह मांग करती है कि केंद्रीय ऊर्जामंत्रालय को सरकार यह प्रस्ताव भेज कर अनुरोध करे की हर माह जो प्रति स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कैपिटल कॉस्ट पर जी0एस0टी वसूल की जाएगी उसे समाप्त किया जाय।उपभोक्ताओ पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले खर्च की भरपाई उपभोक्ताओ से बिजली दर में न हो केंद्र सरकार प्रति स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर होने वाले रुपया 6000 को अनुदान में कन्वर्ट करे। जिससे उसका भार प्रदेश के उपभोक्ताओ पर न पड़े।
जब विद्युत संयोजन लेते वक्त उपभोक्ताओ ने मीटर की कास्ट विभाग में जमा कर मीटर की गारंटी 5 साल होती है फिर पुनः उसके मीटर को बीच में किसी योजना में बदला जाना और उसकी कास्ट उपभोक्ता पर डालना उपभोक्ताओ के हितो के विपरीत है।इसी प्रकार पूरे टेंडर की कास्ट पर एक बार जीएसटी डालकर पुनः उपभोक्ताओ से हर माह उसकी कैपिटल कॉस्ट के साथ जीएसटी की वसूली भी उपभोक्ताओ के हितो के विपरीत है। ऐसे मेें बड़ा सवाल यह है कि हर उपभोक्ता अपने राज्य में 5 से 7 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी विभाग को दे रहा तो फिर पुनः हर माह जीएसटी वसूला जाना उपभोक्ता हितो के विपरीत होगा।
Published on:
19 Mar 2022 11:17 pm
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