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शंखलाल मांझी ने की पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत

आज से पूरे प्रदेश में पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हो गयी। इस अवसर पर 0-5 साल के बच्चों को पोलियो की ड्राप पिलाई जायेगी।

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Rohit Singh

Jan 17, 2016

लखनऊ. पूरे देश में सघन पल्स पोलियो अभियान चलाकर पोलियो को भारत वर्ष से जड़ से उखाड़ कर फेंक दिया गया। भारत में इसके लक्षण भी खत्म हो गए हैं। जबकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इसके लक्षण अभी भी मिल रहे हैं। यूपी में पोलियो ड्रॉप पिलाने के अभियान में हजारों कार्यकर्त्ता जुटे हैं। उनका मैं आभार व्यक्त करता हूं। यह बातें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय (सिविल अस्पताल) में सघन पल्स पोलियो प्रशिक्षण अभियान के शुभारम्भ पर यूपी के चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्यमंत्री शंख लाल मांझी ने कहीं। उन्होंने (0-5) वर्ष के बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ। इस अवसर पर उनके साथ सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव, डॉ. राजेश ओझा, डॉ. आशुतोष दुबे, समेत कई डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।

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मांझी ने कहा पूरे देश में पोलियो का उन्मूलन हो चुका है। यूपी में पोलियो का उन्मूलन 21 अप्रैल 2010 को हो चुका है। फिर भी बच्चों को हमें रिगुलर ड्रॉप पिलानी है। उन्होंने कहा पड़ोसी देशों में अभी भी लक्षण मिल रहे हैं। इसलिए भारत में निरंतर अभियान जारी है ताकि हमारे देश में बिल्कुल लक्षण न मिलें। उन्होंने कहा इस अभियान में रोटरी क्लब, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, आशा बहुओं, और स्वास्थ्य विभाग की टीम को सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया।

यूपी में इतनी टीम कर रही काम
राज्यमंत्री ने बताया यूपी में 3 करोड़ 5 लाख (0-5) साल के बच्चों को पोलियो की ड्रॉप पिलाने के लिए 1 लाख 10 हजार पोलियो बूथ बनाये गए हैं। 65 लोगों की टीम घर-घर जाकर पोलियो ड्रॉप पिलाने के लिए, 16 सौ लोगों की मोबाईल टीम, 65 सौ लोगों की ट्रांजिट टीम, 22 हजार सुपरवाइजर, 3 लाख 30 हजार वैक्सिनेटर के साथ पूरी टीम यूपी में काम कर रही है।

150 अस्पताल 2016 में होंगे कम्प्लीट
मांझी ने कहा यूपी में 2012 में सपा सरकार बनने के बाद से काफी काम और यूपी का विकास हो रहा है समाजवादी विचारधारा के साथ सरकार महापुरुषो जीवांत रखने के लिए सरकार स्मारक पार्को का निर्माण करा रही है. उन्होंने कहा यूपी के खस्ता हाल करीब 150 अस्पताल 2016 में बनकर कम्प्लीट हो जायेंगे इससे ग्रामीण इलाकों में मरीजों की दिक्कतें समाप्त हो जाएंगी। अाखिर में उन्होंने कहा अस्पताल बनवाने में कुछ समय लगता है प्रोजेक्ट एक दिन में कम्प्लीट नहीं हो सकता।

साल 2009 में आये 741 मामले
साल 2009 में भारत में पोलियो के 741 मामले सामने आये थे। जोकि दुनिया में किसी भी देश में सबसे ज्यादा थे। ये आँकड़े वैश्विक पोलियो उन्मूलन इनीशिएटिव नामक संस्था की ओर से जारी किए गए थे। जिससे पूरी दुनिया में मच गया था लेकिन जिस प्रकार भारत ने दो साल के अंदर पोलियो के खिलाफ कभी न रुकने वाल अभियान चलाकर पोलियो को ख़त्म किया, वह काबिलेतारीफ है।

इन चुनौतियों का भी करना पड़ा सामना
भारत में पोलियो उन्मूलन के लिए उच्च जनसंख्या घनत्व, उच्च जन्म दर, साफ़-सफ़ाई की ख़राब व्यवस्था, डायरिया जैसी बीमारी के अलावा मुस्लिम समुदाय में पोलियो वैक्सीन को लेकर फैली भ्रांतियां जीएसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। एनएचएम के महाप्रबंधक डॉ. वेदप्रकाश कहते हैं कि पोलियो को लेकर सभी सरकारों की ओर से प्रयास किये गए, जिससे भारत को पोलियो मुक्त देश बनाया जा सका।

क्या है पोलियो?
पोलियो (पोलियोमायलेटिस) एक संक्रामक बीमारी है, जो वायरस के कारण होती है। यह वायरस गुदा और मुंह के रास्ते तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। इसके शुरुआती लक्षण हैं- बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गरदन में अकड़न और तमाम अंगों में दर्द होना। औसतन 200 संक्रमण में से एक संक्रमण पक्षाघात के रूप में सामने आता है, जो सामान्यत: पैरों पर असर करता है। पक्षाघात के शिकार हुए औसतन 10 मरीजों में से एक मरीज मर जाता है। इसके आलावा पोलियो का सबसे ज्यादा असर पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर होता है।

नहीं है पोलियो का इलाज
पोलियो हो जाने के बाद उसका इलाज संभव नहीं है बस वैक्सीन के माध्यम से इसी रोकथाम की जा सकती है। पांच साल की उम्र तक कई बार पोलियो वैक्सीन (ड्रॉप) देकर बच्चों को इससे बचाया जा सकता है।


पांच साल तक के बच्चों को दी जाती है खुराक
पहले साल में बच्चे को चार खुराक की जरूरत होती है, साथ में हर टीकाकरण दिवस पर पांच साल की उम्र तक के बच्चे को खुराक लेने की जरूरत होती है।

तीन साल बाद पोलियो मुक्त घोषित होता है देश
किसी देश को पोलियो मुक्त घोषित करने के पहले यह देखा जाता है कि पिछले तीन साल में वहां पोलियो का कोई नया मरीज न मिला हो। 1988 में पोलियो उन्मूलन पहल शुरू होने के बाद से पांच लाख लोग, (खास कर विकासशील देशों के) जो पोलियो की वजह से पक्षाघात के शिकार हो सकते थे, बचा लिए गए।

भारत में मिला आखिरी केस
भारत में पोलियो का आखिरी केस 13 जनवरी 2011 में मिला था। यह वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप 1 (डब्लूपीवी1) केस पश्चिम बंगाल के हावड़ा का था। इसमें पांच साल की रुक्शा शाह को पोलियो का संक्रमण हुआ था। संक्रमण का नतीजा यह हुआ कि उसके बायें पैर के मुकाबले दाहिना पैर काफी पतला और कमजोर हो गया।

किसी एक बीमारी को लेकर चला सबसे लंबा अभियान
भारत में पोलियो उन्मूलन अभियान 1995 में शुरू हुआ। जिसमें अब तक 12 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. साथ ही करीब 17.2 करोड़ बच्चों को मिला सुरक्षा कवच मिला। इसमें 24 लाख वैक्सीनेटर शामिल हैं।

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