भाजपा ने जाट वोटों को साधने के लिए इसी समाज से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था लेकिन अब एक साल बाद उसके नेता रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को भी अपने पाले में लाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
UP Politics: विधान सभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन का संकट झेल चुकी भारतीय जनता पार्टी के जाट वोटों में अब बिखराव साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पहली बार 17 जाट विधायक चुने गए। इनमें 10 भाजपा और 7 समाजवादी पार्टी (सपा)-राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के थे। जबकि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 14 जाट विधायक चुने गए थे और इनमें 13 भाजपा और एक रालोद का था इस प्रकार विधानसभा में जाट विधायकों की संख्या तो बढ़ी लेकिन भाजपा की हिस्सेदारी घट गई।
विधानसभा चुनाव के करीब छह महीने के बाद 25 अगस्त को पिछले 31 वर्षों से संगठन और सरकार में किसी न किसी प्रकार की भूमिका में रहने वाले भूपेंद्र चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। यह पहली बार था जब भाजपा ने यूपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसी जाट नेता को सौंपी थी लक्ष्य साफ था कि पश्चिमी यूपी में दरकते जाट वोट बैंक को मजबूती के साथ खड़ा करना।
जाट प्रदेश अध्यक्ष बनाकर इस वोटबैंक पर पकड़ मजबूत करने की भगवा रणनीति का पहला इम्तिहान दिसंबर में मुजफ्फरनगर जिले की जाट बहुल खतौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में लिया गया। सपा-रालोद और आजाद समाज पार्टी (आसपा) के संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर मदन भैया ने भाजपा उम्मीदवार राजकुमारी सैनी को 22 हजार से अधिक वोटों से हराया।
सिर्फ आठ विधायकों वाली रालोद पश्चिम यूपी के 26 जिलों में फैले जाट मतदाताओं पर अपना असर रखती है। इन 26 जिलों में लोकसभा की 27 सीटें हैं जिनमें पिछड़ी जातियों में जाटों का प्रतिशत महज 3.60 फीसद है। लेकिन इनकी आबादी कुल 18 फीसद से अधिक है।
साल 2014 लोकसभा में भाजपा को एकतरफा वोट देने वाला जाट समुदाय साल 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा से छिटक गया। इतना ही नहीं, पश्चिम यूपी में दंगों के कारण छिटकाव के बाद फिर से जाट और मुस्लिम समीकरण एक हो गया और पांच मुस्लिम सांसद जीतने में कामयाब रहे।
हांलाकि इस नुकसान को रोकने के लिए भाजपा ने जाट प्रदेश अध्यक्ष बनाया और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पश्चिम यूपी के जाट बहुल इलाकों में आयोजित कार्यक्रमों में आगे बढक़र हिस्सा लेना शुरू कर दिया। एक कार्यक्रम में उन्होंने जाटों के बीच कहा भी कि हम अकेले रहकर प्रदेश का नेतृत्व नहीं कर पाएंगे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह का भी नाम लिया और कहा कि जाट समुदाय अगर जयंत चौधरी के साथ जाता है तो इसका काफी नुकसान होगा।
नगरीय निकाय चुनाव ने वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन की जमीनी रणनीति की एक बार फिर परीक्षा ली। इन चुनावों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जोड़ी ने विपक्ष को बुरी तरह मात दी। भाजपा ने पश्चिम यूपी में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की चारों महापौर सीटों पर कब्जा जमाया।
जाट वोटबैंक को और छिटकने से बचाने के लिए भाजपा नेता अब खुले तौर पर रालोद से गठबंधन की मांग करने लगे हैं। योगी सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रयागराज में 12 जुलाई को यह कहकर हलचल मचा दी थी कि ओम प्रकाश राजभर और जयंत चौधरी के अलावा भी कई राजनीतिक दलों के नेता लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में आ जाएंगे। ओम प्रकाश राजभर भी भाजपा के साथ आने के बाद लगातार जयंत चौधरी के भगवा खेमे में आने की बात कह रहे हैं।