- कौशलेंद्र बिक्रम सिंह
लखनऊ.
भारत की राजनीति में दो यादव परिवार सर्वाधिक चर्चित हैं। दोनों करीब तीन दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। इन दोनों ने शून्य से शिखर तक का फासला तय किया है। और आज भारतीय राजनीति में दोनों अपरिहार्य अंग हैं। या यूं कहें कि इनके बिना यूपी-बिहार तो क्या देश की राजनीति अधूरी है। खास बात है दोनों ने जातीय समीकरण के भरोसे राजनीति को ऐसा साधा कि न केवल अपनी पार्टी बनाई बल्कि दोनों अपने-अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और अब परिवार के सदस्यों और अपने बेटों को राजनीति में स्थापित कर चुके हैं। ऐसे समय में जब यूपी में समाजवादी पार्टी परिवार में वर्चस्व को लेकर चर्चा में है एक नजर लालू और मुलायम के राजनीतिक सफर पर।
बिहार में लालू प्रसाद यादव का परिवार सत्ता सुख भोग रहा है तो उत्तर प्रदेश के मुलायम सिंह यादव की फैमिली। दोनों नेताओं की शुरुआत बहुत छोटे स्तर से हुई लेकिन जैसे-जैसे सत्ता में इनकी पकड़ मजबूत होती गई इनके सपने बड़े होते गए। खास बात है दोनों ही परिवार एक ही विचारधारा के साथ आगे बढ़े, दोनों पर एक जैसे आरोप लगे।
- दोनों ही परिवारों के मुखियाओं ने कांग्रेस के खिलाफ मुहिम छेड़ीं।
- दोनों ही परिवार की सोच समाजवादी।
- दोनों ही परिवार के कई सदस्य राजनीति में एक्टिव।
- दोनों ही परिवार के मुखिया आपातकाल में जेल गए।
- दोनों ही परिवार ने अपने राज्यों में लंबे समय तक शासन किया।
- दोनों ही परिवार के मुखिया का सपना रहा प्रधानमंत्री बनना।
- दोनों ही परिवार के मुखिया केन्द्र सरकार में मंत्री रहे।
- दोनों ही परिवार के खिलाफ हुई सीबीआई जांच।
- दोनों ही परिवार पर भ्रष्टाचार और अपराधियों के संरक्षण के आरोप लगे।
- दोनों ही परिवार पर समाजवाद को छोड़ परिवारवाद अपनाने के आरोप।
- लालू ने दिया राजनीति में पत्नी को मौका, मुलायम की पत्नी को कम लोग ही जानते हैं।
- लालू ने समय के साथ अपनी चाल बदली, मुलायम रहे कई मामलों में रिजिड।
- लालू अपने वादे के पक्के नजर आए, मुलायम लेते रहे यू-टर्न।
- लालू ने तय किया अपना उत्तराधिकारी, मुलायम ने नहीं।
- लालू ने बेटे को किया आगे, मुलायम खुद बेटे को कर रहे कमजोर।
- लालू के खाते में नीतिश की दोस्ती तो मुलायम के हिस्से में मायावती का गेस्ट हाउस कांड।
मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव दोनों ने समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया को अपना राजनीतिक गुरु मानकर राजनीतिक सफर शुरू किया। दोनों की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा थी और दोनों ही मंजिल के करीब आकर फिसल गए। दोनों लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। मुलायम देश के रक्षा मंत्री तो लालू देश के रेल मंत्री बने। दोनों अपने-अपने दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
कांग्रेस विरोधी लहर की देन हैं लालू और मुलायम
मुलायम सिंह यादव जब विद्यार्थी थे तभी से उनके मन-मस्तिष्क पर डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों की गहरी छाप पड़ी। लोहिया का स्वतंत्र चिंतन, कथनी और करनी का सिद्धांत आज भी मुलायम सिंह यादव को प्रेरणा देता है। जबकि लालू प्रसाद यादव लोहिया के विचारों से प्रेरणा ले आगे बढऩे वाले जय प्रकाश नारायण उर्फ जेपी समर्थक थे। लालू इसी आंदोलन के दौरान युवा समाजवादी नेता के रूप में उभर के सामने आए।
लालू प्रसाद यादव समय के साथ बदलते गए। आज अपने धुर विरोधी रहे नीतिश कुमार के साथ मिलकर बिहार में सरकार चला रहे हैं। बेटा तेजस्वी यादव, बिहार का उपमुख्यमंत्री है। उधर,मुलायम ने अखिलेश को 2012 के चुनावों में भले ही आगे किया और बेटे को उप्र का मुख्यमंत्री बनवाया लेकिन 2017 के आते-आते उन्हें एहसास हुआ कि बेटे का सत्ता देकर गलत किया। इसलिए मुलायम अखिलेश के तमाम अच्छे फैसलों की ही निंदा करते रहे। इससे अखिलेश की छवि ही धूमिल हुई। यानी मुलायम सत्ता मोह से अब भी चिपके हैं। अब उन्हें बेटे की जगह भाई शिवपाल यादव ज्यादा प्यारे लग रहे हैं।