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Chandrayaan- 3: चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग में यूपी के इन युवा वैज्ञानिकों ने निभाई अहम भूमिका

चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग में उत्तर प्रदेश भी भागीदार रहा है। चंद्रमा के दक्षिणी सतह पर भारत के चंद्रयान तीन पहुंचने में इसरो के सैकड़ो वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम रहा है। जिसमें उत्तर प्रदेश के युवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

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उत्तर प्रदेश के युवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

Chandrayaan- 3: चंद्रयान तीन के मिशन में उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज, रामपुर, मुरादाबाद, देवरिया, गाजीपुर, फिरोजाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मिर्जापुर और चंदौली के युवा वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। लखनऊ के ऋतु कृद्धाल मिशन के डायरेक्टर रहे हैं, वह लखनऊ के नवयुग इंटर कॉलेज और लखनऊ विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐरो स्पेस इंजीनियर बन गए। इसी तरह प्रयागराज के हरिशंकर का इस मिशन में बेहद अहम रोल रहा है।

जबकि देवरिया जिले के अभिषेक सिंह ने चंद्रयान 3 की लैंडिंग में सेंसर से मिलने वाले संदेशों को पढ़ने और निर्देश देते रहे। यह के अंतिम 17 मिनट बेहद महत्वपूर्ण थे जब देवरिया के अभिषेक की भूमिका इस मिशन में काफी अहम हो गई। प्रयागराज के ही मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से पढ़ कर चुकी नेहा अग्रवाल इसरो में शामिल हुई और चंद्रयान दो तथा चंद्रयान-3 के मिशन में लगी हुई थी।

इन युवाओं ने निभाई भूमिका
मेरठ के अवनीश चंद्र पांडे मूल रूप से गोंडा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने चंद्रयान के प्रोपेलर जोक यह को आगे बढ़ता है उसके मॉड्यूल सिस्टम को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह फिरोजाबाद के धर्मेंद्र ने सैटेलाइट ट्रैकिंग सिस्टम पर कार्य किया। मुरादाबाद के रजत लांचिंग टीम के हिस्सा रहे। रामपुर के संदीप चौहान ने चौथी स्टेज पर काम किया। गाजीपुर के कमलेश शर्मा ने लैंडिंग कंट्रोल टीम में जिम्मेदारी संभाला।

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के आलोक पांडे ने लैंडिंग टीम में ही भूमिका की चंदौली के शिवांगी मिश्रा ने रडार सिस्टम पर काम किया। इटावा के डॉक्टर अंकुर गुप्ता बरेली के नवाब अहमद एटा के अजीम अहमद ने इस अभियान में दिन-रात कार्य किया। गोरखपुर के डाक्टर पीडी मिश्रा ने चंद्रयान के पोजिशनिंग और वेलोसिटी बताने की जिम्मेदारी निभाई तो अमर यासिर और सना फिरोज ने सेमीकंडक्टर और कैमरा बनाने वाली टीम में कार्य किया।