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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, अब ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को भी मिलेगी पेंशन

ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों के लिए सरकार खुशखबरी लेकर आई है।
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लखनऊ

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Akansha Singh

•

Apr 27, 2018

lucknow

लखनऊ. ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों के लिए सरकार खुशखबरी लेकर आई है। अब ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को भी पेंशन का लाभ मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 56 ग्रामीण बैंको के करीब 85 हज़ार कर्मचारियों को फ़ायदा मिलेगा। ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को भी नेशनलाइज बैंक कर्मियों की तर्ज पर पेंशन मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए नेशनलाइज बैंक कर्मियों की तर्ज पर ग्रामीण बैंक कर्मियों को पेंशन देने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके साथ ही साथ कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर हाईकोर्ट आदेश लागू करें।

क्या है कोर्ट का फैसला

ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों के पेंशन देने के मामले में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाया है। वहीँ कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर पेंशन मांग रहे अन्य प्रान्तों के ग्रामीण बैंक कर्मियों की याचिकाएं भी इस फैसले के आलोक में निपटा दी हैं।

तय हों पेंशन देने के नियम

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2012 में ग्रामीण बैंक पेंशनर्स समिति की याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ यह आदेश दिया है कि वह नेशनलाइज बैंकों की तर्ज पर ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को पेंशन देने के तौर तरीके और नियम तय करे। सरकार को इस आदेश पर तीन महीने के भीतर पालन करना था। केन्द्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

केन्द्र सरकार की ओर से पेश एएसजी संदीप सेठी का कहना था कि ग्रामीण बैंक कर्मियों की पेंशन पाने की पात्रता नहीं बनती। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले से सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ने की भी दलील दी थी। दूसरी और ग्रामीण बैंक पेंशननर्स समिति के वकील पीएस पटवालिया और प्रगति नीखरा ने केन्द्र की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल नेशनलाइज बैंक कर्मियों से ज्यादा कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। उन्होंने बराबरी के हक की दुहाई देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 2001 के साउथ मालाबार मामले में दिये गए फैसले का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने कहा था कि ग्रामीण बैंक कर्मियों को नेशनलाइज्ड बैंक कर्मियों के समान वेतन मिलना चाहिए। उन्होंने 29 अक्टूबर 1993 के नेशनलाइज्ड बैंक यूनियन और भारत सरकार के बीच पेंशन देने को लेकर हुए करार को आधार बनाते हुए ग्रामीण बैंक कर्मियों को भी पेंशन दिये जाने की मांग की थी।