School College Closed in UP: स्कूल बंद होने का असर, जो सीखा था वह भी भूल गए, नया सीखने में दिक्कत, कैसे देंगे परीक्षा

- School College Closed in UP: एक एनजीओ के सर्वे में हुआ खुलासा, बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति भी घटी

पत्रिका एक्सक्लूसिव

लखनऊ. उप्र में बढ़ते कोरोना संक्रमण (Coronavirus) की वजह से प्रदेश के सभी स्कूल कालेज (School College Closed in UP) 15 मई तक बंद कर दिए गए हैं। हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं टाल दी गयी हैं। ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन डिजिटल एजूकेशन या फिर ऑन लाइन पढ़ाई के संबंध में किए गए सर्वेक्षण के आंकड़े भयावह हैं। प्रदेश के सिर्फ चार जिलों के बच्चों और शिक्षकों से बातचीत के निष्कर्ष यह हैं कि लॉकडाउन और स्कूल बंद होने की वजह बच्चों ने पिछली कक्षाओं में जो सीखा था वह उसे भूल चुके हैं। सर्वे के निष्कर्ष यह है कि बच्चों में सीखने की प्रवित्ति भी तेजी से घट रही है।

करीब 11 महीने तक स्कूल बंद रहने के बाद जब खुले तब कोरोना की दूसरी लहर के बाद फिर से उन्हें बंद करना पड़ा। इसके पहले लॉकडाउन की वजह से बच्चों की शिक्षा से जुड़े नुकसान का आंकलन करने के लिए अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने यूपी के चार जिलों में एक फील्ड स्टडी करवायी थी। जिसमें पाया गया कि कोरोना के बीच स्कूल बंद होने से बच्चों ने पिछली कक्षाओं में जो सीखा था वो उसे भूलने लगे हैं। इससे वर्तमान सत्र की कक्षाओं में भी उन्हें सीखने में परेशानी हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों में ज्यादा पड़ा है। ऑनलाइन क्लास का ठीक से न चल पाना, इंटरनेट और मोबाइल जैसी सुविधाओं का न होना और पढ़ाई के प्रति अरूचि की वजह से बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति चली गयी। भाषाख् विज्ञान और गणित जैसे विषयों में सबसे ज्यादा परेशानियां का सामना करना पड़ा। इसके अलावा बच्चों को किताबों को पढ़कर अर्थ समझने में भी दिक्कत आ रही है।

कहां हुआ अध्ययन

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने फील्ड स्टडी के लिए पांच राज्यों (छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड) को चुना था। इन राज्यों के 44 जिलों के 1,137 सरकारी स्कूलों के कक्षा 2 से कक्षा 6 तक के 16,067 छात्रों को सर्वे में शामिल किया गया। सर्वे के मुताबिक, कोरोना के बीच स्कूल बंद होने से बच्चों ने पिछली कक्षाओं में जो सीखा था उसे भूलने लगे हैं। इसी तरह एक निजी संस्था ने उप्र के चार जिलों (लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या और देवरिया) के बच्चों और शिक्षकों से बात की उनके निष्कर्ष भी वही रहे अन्य राज्यों के थे।

सर्वे के निष्कर्ष

54 प्रतिशत छात्रों की मौखिक अभिव्यक्ति प्रभावित हुई है।
42 प्रतिशत छात्रों की पढऩे की क्षमता प्रभावित हुई है।
40 प्रतिशत छात्रों की भाषा लेखन क्षमता प्रभावित हुई है।
82 प्रतिशत छात्र पिछली कक्षाओं में सीखे गए गणित के सबक को भूल गए हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई में यह दिक्कतें

उत्तर प्रदेश के शिक्षकों और बच्चों ने सर्वे में बताया कि ऑनलाइन क्लास फोन के माध्यम से होती है। गरीब तबके के 50 प्रतिशत परिवारों के पास एक ही फोन होता है। अभिभावक काम पर जाते हैं तो फोन लेकर चले जाते हैं इससे बच्चे की पढ़ाई नहीं हो पाती। टीवी चैनल के माध्यम से पढ़ाई से संबंधित कार्यक्रम के वक्त बिजली चले जाने पर बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। तमाम बच्चों ने पढऩे और पढ़ाने के बीच की रुकावटें और बिजली का न होना जैसी असुविधा के बारे में बताया। पता चला कि सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 60 प्रतिशत बच्चों के पास ऑनलाइन शिक्षा के लिए मोबाइल-लैपटॉप मौजूद नहीं हैं।

यूपी में 1.14 लाख प्राइमरी स्कूल

उत्तर प्रदेश में करीब 1.14 लाख प्राथमिक और करीब 54 हजार उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। मार्च 2021 से इन स्कूलों की को 50प्रतिशत क्षमता के साथ खोला गया। एक कक्षा के बच्चों को हफ्ते में दो दिन ही स्कूल बुलाया गया। फिर होली की छूट्टी और बाद में कोरोना की वजह से एक से आठ के स्कूल 11 अप्रेल तक बंद कर दिए। अब 15 मई तक बंद हैं।

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नितिन श्रीवास्तव
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