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Brahmin Prabuddh Sammelan: फरसा लेकर मंच पर पहुंचे निलंबित PCS अधिकारी, लखनऊ कार्यक्रम में मचा हंगामा

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम के दौरान निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के फरसा लेकर मंच पर पहुंचने से हंगामा मच गया और कार्यक्रम विवादों में घिर गया।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Mar 01, 2026

भाषण के दौरान शुरू हुआ टकराव (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

भाषण के दौरान शुरू हुआ टकराव (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Brahmin Prabuddh Sammelan 2026 : लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम उस समय विवाद और हंगामे का केंद्र बन गया, जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री मंच पर फरसा लेकर पहुंच गए। उनके भाषण को लेकर आयोजकों और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। कार्यक्रम में कई प्रमुख सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

कार्यक्रम की शुरुआत शांतिपूर्ण, बाद में बढ़ा विवाद

ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध वर्ग को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यह समागम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में समाज के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को आमंत्रित किया गया था। शुरुआती सत्र शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। विभिन्न वक्ताओं ने समाज की शिक्षा, रोजगार, सामाजिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर विचार रखे। लेकिन माहौल उस समय बदल गया जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को बोलने के लिए मंच पर बुलाया गया।

भाषण के दौरान शुरू हुआ टकराव

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अलंकार अग्निहोत्री ने अपने संबोधन के दौरान कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बोलना शुरू किया, जिनमें कथित रूप से सरकार की नीतियों और मंदिरों से जुड़े चंदा व्यवस्था जैसे विषय शामिल थे। आयोजकों ने उन्हें निर्धारित विषयों तक सीमित रहने का आग्रह किया। आयोजकों और मंच संचालकों द्वारा बार-बार रोकने के बाद मंच पर ही बहस की स्थिति बन गई। बताया जाता है कि आयोजकों ने माइक बंद कर दिया और उन्हें मंच से उतरने को कहा। इस घटना के बाद कार्यक्रम का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।

फरसा लेकर मंच पर वापसी

मंच से हटाए जाने के कुछ समय बाद अलंकार अग्निहोत्री दोबारा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस बार उनके हाथ में फरसा (पारंपरिक हथियार) था। उन्हें इस रूप में मंच की ओर बढ़ते देख कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में हलचल मच गई। जैसे ही वे मंच के करीब पहुंचे, उनके समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने इसे विरोध प्रदर्शन का रूप दे दिया, जबकि आयोजक कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने में जुट गए। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों और आयोजकों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और माहौल को शांत करने का प्रयास किया।

समर्थकों की नारेबाजी से बढ़ी अफरा-तफरी

घटना के दौरान समर्थकों और आयोजकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नारेबाजी और हंगामे के कारण कुछ समय के लिए कार्यक्रम की कार्यवाही रोकनी पड़ी। उपस्थित लोगों में असहजता और भय का माहौल भी देखने को मिला। हालांकि किसी के घायल होने या बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली, लेकिन मंच पर हथियार जैसी वस्तु लेकर पहुंचने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार्यक्रम में मौजूद थे कई प्रमुख नेता

समागम में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। घटना के बाद अधिकांश अतिथियों ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बचते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कुछ नेताओं ने निजी तौर पर कहा कि सामाजिक संवाद के मंच पर इस प्रकार की घटनाएं लोकतांत्रिक चर्चा की गरिमा को प्रभावित करती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रश्न उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन में प्रतिभागियों की जांच और प्रवेश व्यवस्था को और सख्त बनाने की आवश्यकता है। वीआईपी कार्यक्रमों में बहुस्तरीय सुरक्षा जांच जरूरी। मंच तक पहुंच नियंत्रित होनी चाहिए। संवेदनशील कार्यक्रमों में अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था होनी चाहिए

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। कई लोगों ने इसे सुरक्षा चूक बताया, जबकि कुछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मंच संचालन के तरीके पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर घटना को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

सामाजिक संवाद की मर्यादा पर बहस

लखनऊ में हुई यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि सार्वजनिक मंचों पर संवाद की मर्यादा और जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक समाज में विचारों की स्वतंत्रता आवश्यक है, लेकिन इसके साथ संयम और शालीनता भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है। ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम में हुआ यह हंगामा फिलहाल राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।