
Swami Vivekanand Jayanti 2018 : आज 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की 155वीं जन्मतिथि है। भारत में 12 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में स्वामी विवेकानन्द का जन्मदिन मनाया जाता है। इस दिन हर वर्ष भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1984 ई. को 'अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष' घोषित किया गया था। अध्यात्म के क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद के योगदान के लिए 1984 में भारत सरकार ने उनकी जयंती के दिन युवा दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसके महत्व का विचार करते हुए भारत सरकार ने घोषणा की थी कि सन 1984 से 12 जनवरी यानी स्वामी विवेकानन्द जयन्ती का दिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में देशभर में सर्वत्र मनाया जाए।
सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया
स्वामी विवेकानन्द जन्म 12 जनवरी,1863 में कुलीन कायस्थ परिवार में हुआ था और मृत्यु 4 जुलाई, 1902 में में हुी थी। स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1863 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुंचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों" के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।
दुनिया को अध्यात्म का महत्व समझाया
स्वामी विवेकानंद वो व्यक्ति थे जिन्होनें 25 साल की उम्र में ही घर-परिवार को छोड़कर सन्यास ले लिया था और दुनिया को अध्यात्म का महत्व समझाया था। धार्मिक विचारधारा रखने वाले स्वामी विवेकानंद जी के हर दिन के नियम में पूजा-पाठ को भी शामिल थी। स्वामी विवेकानंद ने पूरे देश में रामकृष्ण मठ की स्थापना की थी। वो एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्यों में कोई भेदभाव न रहे। उनके विचार ऐसे थे कि निराश व्यक्ति भी अगर उसे पढ़े तो उसे जीवन जीने का एक नया मकसद मिल जाता था।
जानिए स्वामी विवेकानंद के ऐसे अनमोल विचार, जो आपके जीवन की दिशा को बदल सकते हैं।
1. जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।
2. जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।
3. पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान। ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है।
4. पवित्रता, धैर्य और उद्यम- ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हैं।
5. उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तमु अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।
6. ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है।
7. एक समय में एक काम करो , और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
8. जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।
9.ध्यान और ज्ञान का प्रतीक हैं भगवान शिव , सीखें आगे बढ़ने के सबक।
10. लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
Updated on:
12 Jan 2018 05:44 pm
Published on:
12 Jan 2018 03:38 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
ट्रेंडिंग
