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बारिश को तरसे यूपी के ये जिले, बोआई और रोपाई में पिछड़ा प्रदेश

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है

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बारिश को तरसे यूपी के ये जिले, बोआई और रोपाई में पिछड़ा प्रदेश

लखनऊ. एक ओर जहां पूरा यूपी मानसून का इंतजार कर रहा है, तो वहीं दूसरी ओर यूपी के 30 जिले भयंकर सूखे की चपेट में हैं। बारिश का इंतजार कर थक गए कई ऐसे जिले हैं, जहां बारिश हुई ही नहीं या फिर कम वर्षा हुई है। लिहाजा उत्तर प्रदेश बोआई और रोपाई में काफी पीछे रह गया है। कृषि नेदाशालय ने अधिकारियों को अलर्ट जारी कर इस गंभीर स्थिति पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

इन जिलों का हाल है बेहाल

मौसम विभाग के आंकड़ों को देखें, तो चित्रकूट और चंदौली में पांच फीसदी वर्षा भी नहीं हुई है। ये जिले सूखे की चपेट में हैं। कुशीनगर का भी कुछ ऐसा ही हाल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संस्दीय क्षेत्र वाराणसी में भी बारिश की मात्रा काफी कम रही है। जौनपुर, कानपुर और अमरोहा में सामान्य से एक चौथाई बारिश ही नहीं हुई है। वहीं कासगंज, कौशंबी, औरेया, गाजियाबाद, मैनपुरी और फतेहपुर में सूखा इस कदर है कि वहां हल चलाने लायक भी नमी नहीं है।

31 जुलाई तक तैयार होगी रिपोर्ट

कृषि निदेशक सोराज सिंह का कहना है कि कम बारिश की वजह से बोआई प्रभावित हुई है। इसके लिए विभाग अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए 31 जुलाई का इंतजार करेगा। अगर बारिश अच्छी हुई, तो तेजी से बोआई का करबा बढ़ेगा। इसके बाद बोआई की जैसी भी स्थिति रहेगी, उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।

इन जिलों में सामान्य से 40 फीसदी वर्षा

यूपी के हमीरपुर, संभल, सीतापुर, अलीगढ़, अमेठी, फिरोजाबाद, हापुड़, बिजनौर, फैजाबाद. लखनऊ, मेरठ, संत रविदासनगर, सोनभद्र, बांदा, झांसी, फैजाबाद, मुरादाबाद, बुलंदशहर, उन्नाव, मिर्जापुर, कानपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, हरदोई और शामली में बहुत ही कम वर्षा हुई है।

बारिश के लिए तरसे ये जिले

यूपी के वाराणसी, पीलीभीत, महाराजगंज, रायबरेली, संतकबीरनगर, जालौन, रामपुर, बस्ती, ललितपुर, गाजीपुर, बदायूं, इटावा, देवरिया जौनपुर, अमरोहा, आजमगढ़, महोबा, बलिया, कानपुर देहात, फतेहपुर, गौतमबुद्ध नगर, फतेहपुर, चंदौली और मऊ में सूखे की स्थिति है।

सूखे की स्थिति के कारण यूपी में इस साल अभी तक 35 लाख हेक्टेयर में ही बोआई हो सकी है। पिछले आंकडो़ं के मुकाबले यह काफी कम है। पिछले साल 49 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसलें लगाई गयी थीं। बता दें कि प्रदेस में कुल 94 लाख हेक्टेयर से खरीफ की फसलें ली जाती हैं।