लखनऊ। न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद नगर निगम प्रशासन
नींद से जगा है। शहर भर में निगम ने अवैध डेरियों के खिलाफ कार्रवाही की
कवायत शुरू कर दी है। कार्रवाही के दौरान आंकड़े सामने आये हैं कि शहर भर
में हज़ारों अवैध डेरियों का संचालन हो रहा है। इसी के साथ शहर भर में
खुलेआम गाय घूमती नज़र आती हैं पर निगम के आकंडों की माने तो शहर में कुल 14
ही गाय हैं।
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गौरतलब
है कि शहर में भारी तादात में अवैध तबेले और डेरी संचालित हो रहीं
हैं। ख़ास बात ये भी है कि कोर्ट के आदेशों के बाद एक्टिव हुए नगर निगम के
पास कोई पुख्ता डाटा नही है कि शहर भर में डेरियां कहां कहां हैं। इसक
अदंजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्रांसपोर्ट नगर (एफ और एस
ब्लॉक) और जोन छह स्थित शेखपुर में सालों से अवैध तबेले और डेरी संचालित हो
रहीं हैं। लेकिन अभी तक इन पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकी है। अभी तक की गई
कार्रवाही में भी इन डेरियों का जिक्र नहीं है।
हो रही है समस्याएं
स्थानीय लोगों का आरोप
है कि क्षेत्र में खाली प्लाट में डेरी संचालकों का कब्जा है। इनसे
निकलने वाली गंदगी और क्षेत्र की खराब स्थिति से क्षेत्रवासियों का जीना
दुश्वार है। बारिश के मौसम में तरह-तरह की बीमारियां पनपने लगती हैं। लेकिन
लिखित और कन्ट्रोल रूम पर शिकायत करने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं
की गई है।
लखनऊ में है कुल 14 गाय
जिम्मेदारों
की सुस्त कार्यप्रणाली का आलम ये है कि शहर में हजारों अवैध डेरी व तबेले
संचालन के बाद भी नगर निगम की फाइल ये बयां करती है कि लखनऊ भर में मात्र
14 ही गाय रजिस्टर्ड हैं। जबकि शहर की सड़क मुहल्ले कुछ और ही हकीकत बयां
करते हैं । शहर
भर में हज़ारो गाय घूमती हुई पाई जा सकती है। जिनमें से कुछ आवारा औैर कुछ
पालतू होती हैं। नगर निगम की नियमावली के अनुसार गाय पालन को लेकर लाइसेंस
बनबाना अनिवार्य है।
हो रही है कार्यवायी
पशु चिकित्सक अधिकारी अरविन्द राव बताते हैं कि अवैध तबेले और डेरी संचालको
के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। खुद और शिकायत पत्रों के आधार
पर निरीक्षण किया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ नोटिस भेज कानूनी कार्रवार्ई
की जारही है। अभी तक करीब 300 से अधिक के खिलाफ नोटिस और मुकद्दमा पंजीकरण
की कार्रवाई की गयी। कुछ के खिलाफ नोटिस भेजा जा चुका है तो कुछ के खिलाफ भेजा जा रहा है। ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।