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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की बर्फ से ढकी पहाड़ियों से आई खबर ने हर संवेदनशील मन को भीतर से झकझोर दिया। प्रसिद्ध भरमाणी माता मंदिर के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ में फंसने से दो युवकों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस त्रासदी के बीच एक पालतू श्वान की निष्ठा और प्रेम ने इंसानियत को नई परिभाषा दे दी। वह अपने मालिकों की मौत के बाद भी चार दिन तक उनके बेजान शरीरों के पास अडिग बैठा रहा। न भूख की परवाह, न ठंड का डर, उसने अपने मालिकों के साथ अंतिम क्षण तक वफादारी निभाई।
जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी को घरेड़ निवासी विकसित राणा (19) और मलकोता निवासी उसका ममेरा भाई पीयूष (13) भरमाणी माता के दर्शन के लिए निकले थे। उनके साथ पीयूष का पातलू श्वान भी मौजूद था। दोनों मंदिर के ऊपरी इलाकों में वीडियो शूट कर रहे थे, इसी दौरान मौसम खराब हो गया। तेज बर्फबारी, तूफान और शून्य से नीचे के तापमान में दोनों किशोर फंस गए। शाम को परिजनों से आखिरी बार बातचीत में उन्होंने खुद को सुरक्षित बताया था, लेकिन उसके बाद संपर्क टूट गया। परिजनों ने अगले दिन प्रशासन को सूचित किया तो प्रशासन, पुलिस, सेना और वायुसेना उन्हें ढूंढती रही लेकिन उन्हें किशोरों का सुराग नहीं मिला।
इसके बाद सोमवार को जब रेस्क्यू टीम बर्फ की चादर चीरती हुई ऊपर पहुंची तो देखा कि एक श्वान ठंड से ठिठुरता हुआ, अपने मालिक के शव के पास बैठा था। न भोजन, न पानी। चार दिन, चार रातें। फिर भी वह अपनी जगह से हिला नहीं। गले में हल्की चोट थी, शरीर कांप रहा था, लेकिन निगाहें वहीं टिकी थीं, जैसे अब भी इंतजार कर रहा हो कि मालिक उठ जाएगा।
पहले पीयूष का शव पहाड़ी पर एक पेड़ के पास बरामद हुआ। सुरक्षा को देखते हुए श्वान को बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया, तब कहीं जाकर शव को निकाला जा सका। बाद में पास के एक नाले से विकसित का शव भी मिला। दोनों शवों को हेलीकॉप्टर से भरमौर हेलीपेड लाया गया। श्वान को जिंदा रेस्क्यू कर परिजनों को सौंप दिया गया।
Published on:
28 Jan 2026 05:35 am

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