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सीएम योगी ने ऐसा क्या कह दिया कि भड़के पंडे और पुरोहित, संतों ने भी नाराजगी जताई

उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और तीर्थस्थलों पर पंडागिरी से श्रद्धालुओं को होनी वाली परेशानी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान से हंगामा मचा हुआ है

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Feb 23, 2020

cm yogi statement on mandir pooja

मुख्यमंत्री के बयान पर भले ही सबकी अलग-अलग राय है, लेकिन सभी इस पर एकमत हैं कि हर मंदिर के लिए एक जैसा नियम बनाना संभव नहीं है।

लखनऊ. यूपी के प्रमुख मंदिरों और तीर्थस्थलों पर पंडागिरी से श्रद्धालुओं को होनी वाली परेशानी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान से हंगामा मचा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों में जाने पर लोग जबरदस्ती रक्षासूत्र बांधकर होने वाली पंडागिरी से बहुत परेशान होते थे। हमने इस समस्या का भी समाधान निकाला और तय किया कि कोई भी पंडा या पुरोहित अपने अनुसार पूजा नहीं करवाएगा। सीएम योगी ने शनिवार को यह बयान लखनऊ में आयोजित भारतीय भाषा महोत्सव में दिया। सीएम के बयान पर तीर्थ पुरोहितों, पंडों और संतों ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। अयोध्या के संतों व पंडों ने इसका स्वागत किया है वहीं, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के सदस्य ने मुख्यमंत्री के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री पंडा-पुरोहितों के खिलाफ कोई कथित कार्रवाई करते हैं तो तीर्थ पुरोहित उनके विरोध में उतरेंगे और एक बड़ा आंदोलन करेंगे। नैमिषारण्य, विध्यांचल धाम, मथुरा और प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि श्रद्धालु खुद ही मंदिर में लगे दानपात्र में गुप्त दान करते हैं। इसके लिए उन्हें बाध्य नहीं किया जाता। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि जो मंदिर साधु संतों और महात्माओं के नियंत्रण में हैं, वहां ऐसा नहीं होता है। मुख्यमंत्री के बयान पर भले ही सबकी अलग-अलग राय है, लेकिन सभी इस पर एकमत हैं कि हर मंदिर के लिए एक जैसा नियम बनाना संभव नहीं है।

यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान दें सीएम : विंध्य पंडा समाज
विंध्याचल में मंदिर की देख रेख करने वाली संस्था 'विंध्य पंडा समाज' के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी का कहना है कि विंध्याचल में अभी तक इस तरह की व्यवस्था नहीं है। यात्री चाहता है तभी तीर्थ पुरोहित दर्शन पूजन कराने जाते हैं। जहां तक रक्षा सूत्र बांधने की बात है तो वह वही पंडा बंधता है, जो यात्री का तीर्थपुरोहित होता है। किसी ने मुख्यमंत्री जी को गलत जानकार दी है। वहीं, विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक का कहना है कि मंदिर में दर्शन पूजन करने के लिए आने वाले यात्रियों को जो पंडा दर्शन और पूजन कर्मकांड कराते हैं, वह यात्रियों की ही सहमति से होता है। पंडा हमेशा यात्रियों का कल्याण चाहता है। वहीं, पूर्व पंडा समाज के अध्यक्ष धर्मेंद्र पांडेय का कहना है कि कुछ पंडा धंधा कर रहे हैं जिसकी वजह से पूरा पंडा समाज बदनाम हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री वाकई सुधार करना चाहते है तो पंडा समाज के बजाय यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

सीएम का बयान दुर्भाग्यपूर्ण, खराब कर रहे छवि : अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा
सीएम के बयान पर मथुरा के पंडा और तीर्थ पुरोहितों नाराज हैं। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के सदस्य राकेश तिवारी ने कहा कि जिस तरह से योगी जी ने बयान दिया है बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी बयानबाजी कर वह अपनी छवि खराब कर रहे हैं। और यह तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों का हनन भी है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री पंडा-पुरोहितों के खिलाफ कोई कथित कार्रवाई करते हैं तो तीर्थ पुरोहित उनके विरोध में उतरेंगे और एक बड़ा आंदोलन करेंगे। राकेश तिवारी ने कहा कि यजमान और तीर्थ पुरोहित का एक परिवार जैसा संबंध होता है और तीर्थ पुरोहित ही अपने यजमान की रुकने की खाने की व्यवस्था करता है। बदले में तीर्थ पुरोहित कभी भी अपने यजमान से दक्षिणा नहीं मांगता। यजमान अपनी श्रद्धा से देना चाहे वह देकर जा सकता है। इसके लिए जबरदस्ती जैसी कोई बात नहीं है।

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अयोध्या के पंडों-संतों ने किया स्वागत
अयोध्या के पंडा समाज व संतों ने सीएम योगी आदित्यनाथ के इस बयान का स्वागत किया है। हनुमान गढ़ी के पुजारी राजू दास कहते हैं कि अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अक्सर पंडाओं के द्वारा विवाद होता रहा है। और मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालु के बाहर आते ही पंडा द्वारा ठगी का शिकार हो जाते हैं जिस लगाम लगाना बहुत जरूरी हो गया। वही, पंडा पुरोहित समाज के अध्यक्ष ओम प्रकाश पांडेय ने बताया कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा भाव से चढ़ाते हैं। लेकिन कुछ लोगो द्वारा इसे व्यापार का रूप दे दिया गया है। इस पर रोक लगनी चाहिए।

नैमिषारण्य के तीर्थ पुरोहित नाराज, कहा- किसी से वसूली नहीं होती
88 हजार ऋषियों की तपोभूमि नैमिषारण्य में स्थित मंदिर मां ललिता देवी मंदिर के अलावा कालीपीठ, वेदव्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी, देव देवेश्वर और भूतनाथ मंदिर प्रमुख हैं, जहां हर दिन सैकड़ों श्रद्दालु पहुंचते हैं। ललिता देवी मंदिर के पुरोहित शैल मिश्रा का कहना है कि यहां किसी भी प्रकार से श्रद्धालुओं से कोई वसूली नहीं की जाती है। सीएम योगी के बयान से नाराज चक्र तीर्थ के किनारे घाटों पर बैठे पुरोहितों का कहना है कि कोई भी पंडा किसी से कोई वसूली नहीं करता हैं। हर श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से ही दान करता है।

हर मंदिर की अपनी पूजा पद्धति : महंत नरेंद्र गिरी महाराज
मुख्यमंत्री के बयान पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बड़े हनुमान मंदिर प्रयागराज के महंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि जो मंदिर साधु संतों और महात्माओं के नियंत्रण में हैं, वहां ऐसा नहीं होता है। रक्षा सूत्र बांधना पूजा पद्धति की एक परंपरा है। श्रद्धा पूर्वक दर्शनार्थियों व तीर्थयात्री रक्षा सूत्र बंधवाते हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर मंदिरों के बाहर लोग रक्षा सूत्र बांधने और तिलक लगाने को रोजगार बना लिया है। वह गलत है उस पर अंकुश लगना चाहिए। लेकिन मंदिरों में पूजा-पाठ कैसे कराया जाएगा, इस पर नियंत्रण नहीं होना चाहिए। हर मंदिर की अपनी पद्धति है, हर स्थान का अपनी परंपरा है, जिसके अनुसार पूजा पाठ कराई जाती है।

सरकारी सिस्टम से चल रहे मंदिरों में ही वसूली : महंत आनंद गिरी महाराज
योगगुरु महंत स्वामी आनंद गिरी महाराज ने कहा कि दर्शनार्थियों से जबरन वसूली उन्हीं मंदिरों में होती है, जहां पर सरकारी सिस्टम लागू है। विंध्याचल, विश्वनाथ मंदिर और बगलामुखी मंदिर जो सरकार द्वारा नियंत्रित होती है। इन स्थानों पर आए दिन दर्शनार्थियों से भी विवाद की बात सामने आती है और दक्षिणा के नाम पर पैसे लिए जाते हैं उन्होंने कहा कि देश भर में जो भी मंदिर संतों या मठों में हैं, वहां पर ऐसा नहीं होता है।

हर मंदिर के लिए एक जैसा नियम बनाना संभव नहीं है : स्वामी घनानंद
प्रयागराज स्थित मनकामेश्वर मंदिर के पुजारी स्वामी घनानंद ने कहा कि हर मंदिर के लिए एक जैसा नियम नहीं बनाया जा सकता है। हरदेव व स्थल पर अलग-अलग पूजा की परंपरा है। हमारे मंदिरों में न तो जबरदस्ती पैसे मांगे जाते हैं और न रक्षा सूत्र बांधा जाता है। आने वाला श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से जो ईश्वर को देता है, वही मंदिर में चढ़ता है। सरकार द्वारा हर मंदिर के लिए एक जैसा नियम बनाना संभव नहीं है। अगर इस तरह होता है तो यह उचित भी नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंदिरों में जाने पर लोग जबरदस्ती रक्षासूत्र बांधकर होने वाली पंडागिरी से बहुत परेशान होते थे। हमने इस समस्या का भी समाधान निकाला और तय किया कि कोई भी पंडा या पुरोहित अपने अनुसार पूजा नहीं करवाएगा। सीएम योगी ने शनिवार को यह बयान लखनऊ में आयोजित भारतीय भाषा महोत्सव में दिया।

बीजेपी प्रवक्ता बोले
यूपी बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि यह सत्य है कि उत्तर भारत के कई मंदिरों व तीर्थ स्थलों में दान-संकल्प के नाम पर कुछ पंडों द्वारा उगाही की जाती है, लेकिन इसके लिए सभी को दोषी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद ही बड़े मठ के मठाधीश हैं। ऐसे में वह श्रद्धालुओं को आने वाली दिक्कतों को जानते हैं। भक्तों की सुविधा के लिए अगर सरकार ऐसा कोई नियम लाना चाह रही है तो यह स्वागत योग्य है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
सीएम ऑफिस के अधिकाकारिक ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए उपरोक्त बयान ट्वीट किया गया। इस ट्वीट को अब तक दो हजार से अधिक बार रिट्वीट किया गया है, वहीं कई हजार लोगों ने लाइक किया है। ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया यूजर पक्ष-विपक्ष में तरह-तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। सुनीता गौतम लिखती हैं, जितना दान आता है वह अगर सरकारी खजाने में न जाए और पंडितों को मानदेय दिया जाए तो यह समस्या खत्म हो जाएगी। सुषमा लिखती हैं, प्रयागराज और गया जी मे पंडे बहुत बुरी तरह से परेशान करते हैं। पहली बार में आदमी बुरी तरह घबरा जाता है। विनय कुमार मिश्रा लिखते हैं कि मुख्यमंत्री जी, सर्वप्रथम आप विंध्यवासिनी मंदिर को पंडा जनों की अत्याचार से मुक्ति दिलाइये। प्रशांत पटेल उमराव इसे बहुत अच्छा कदम बताते हैं। तनवीर अहमद लिखते हैं, क्या अब दलितों का प्रवेश होगा मंदिर में। फूल सिंह लिखते हैं, कभी शिक्षा और रोजगार पर भी बोल लिया करो बाबा।

दान लेने की क्या है व्यवस्था
उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थल काशी, अयोध्या, मथुरा, विन्ध्याचल और प्रयागराज में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। तीर्थ किनारे पुरोहित दान जरूर लेते हैं, लेकिन मंदिरों में गुप्त दान के लिए दान पात्र लगे हैं। पुरोहितों का कहना है कि अगर कोई श्रद्धालु अपना दान, दान पात्र के अलावा नगद धनराशि देना चाहता है तो बाकायदा बोर्ड लगाकर उसके नाम का जिक्र किया जाता है। काशी में बाबा विश्वनाथ, अयोध्या में रामलला व हनुमानगढ़ी, मथुरा में कृष्ण मंदिर, मिर्जापुर में मां विध्यवासिनी और नैमिषारण्य में ललिता देवी, आदि कई प्रमुख मंदिर हैं, जहां दान लेने के लिए गुप्त दान का ही प्रयोग किया जाता है।

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