
नवाबों के शहर आए हैं तो यहां जरूर घूमें, ये हैं लखनऊ की शान, जानिये इनके बारे में
लखनऊ. आज वर्ल्ड टुरिज्म डे हर जगह मनाया जा रहा है। अगर घूमने की बात की जा रही है तो नवाबों का शहर लखनऊ कैसे पीछे रह सकता हैं। आज लखनऊ को पूरा देश या यूं कहें पूरा विश्व जनता है। यहां की धरोहर, इमारतें मुगलों के ज़माने की हैं जो हर जगह फेमस है। अब इन सब से हट कर बॉलीवुड ने भी अपने कदम लखनऊ में रख लिए हैं। इनमें अभी रेड मूवी ही लेटेस्ट है जिसकी शूटिंग लखनऊ में हुई है। इसके अलावा जॉली एलएलबी 2, दावते इश्क़, यंगिस्तान इत्यादि मूवी की शूटिंग भी यहीं हुई है। इन सब के बाद यहां बहुत सारी जगह घूमने वाली हैं। आइये इनपर एक नज़र डालिये...
रूमी दरवाजा
बड़ा इमामबाड़ा की तर्ज पर ही रूमी दरवाजे का निर्माण भी अकाल राहत प्रोजेक्ट के अन्तर्गत किया गया है। नवाब आसफउद्दौला ने यह दरवाजा 1783 ई. में अकाल के दौरान बनवाया था ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। अवध वास्तुकला के प्रतीक इस दरवाजे को तुर्किश गेटवे कहा जाता है। रूमी दरवाजा कांस्टेनटिनोपल के दरवाजों के समान दिखाई देता है। यह इमारत 60 फीट ऊंची है।
इमामबाड़ा
यह इमामबाड़ा मोहम्मद अली शाह की रचना है जिसका निर्माण 1837 ई. में किया गया था। इसे छोटा इमामबाड़ा भी कहा जाता है। माना जाता है कि मोहम्मद अली शाह को यहीं दफनाया गया था। इस इमामबाड़े में मोहम्मद की बेटी और उसके पति का मकबरा भी बना हुआ है। मुख्य इमामबाड़े की चोटी पर सुनहरा गुम्बद है जिसे अली शाह और उसकी मां का मकबरा समझा जाता है। मकबरे के विपरीत दिशा में सतखंड नामक अधूरा घंटाघर है। 1840 में अली शाह की मृत्यु के बाद इसका निर्माण रोक दिया गया था। उस समय 67 मीटर ऊंचे इस घंटाघर की चार मंजिल ही बनी थी। मोहर्रम के अवसर पर इस इमामबाड़े की आकर्षक सजावट की जाती है।
रेज़ीडेंसी
लखनऊ रेजिडेन्सी के अवशेष ब्रिटिश शासन की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। सिपाही विद्रोह के समय यह रेजिडेन्सी ईस्ट इंडिया कम्पनी के एजेन्ट का भवन था। यह ऐतिहासिक इमारत शहर के केन्द्र में स्थित हजरतगंज क्षेत्र के समीप है। यह रेजिडेन्सी अवध के नवाब सआदत अली खां द्वारा 1800 ई. में बनवाई गई थी।
जामा मस्जिद
हुसैनाबाद इमामबाड़े के पश्चिम दिशा में जामी मस्जिद स्थित है। इस मस्जिद का निर्माण मोहम्मद शाह ने शुरू किया था लेकिन 1840 ई. में उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने इसे पूरा करवाया। जामी मस्जिद लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद है। मस्जिद की छत के अंदरुनी हिस्से में खूबसूरत चित्रकारी देखी जा सकती है। प्रार्थना के लिए गैर मुस्लिमों का मस्जिद में प्रवेश वर्जित है।
पिक्चर गैलरी
हुसैनाबाद इमामबाड़े के घंटाघर के समीप 19वीं शताब्दी में बनी यह पिक्चर गैलरी है। यहां लखनऊ के लगभग सभी नवाबों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं। यह गैलरी लखनऊ के उस अतीत की याद दिलाती है जब यहां नवाबों का डंका बजता था।
अम्बेडकर पार्क
गोमतीनगर स्थित अम्बेडकर मेमोरियल पार्क की। इस पार्क का निर्माण गुलाबी पत्थरों से हुआ है..जो रात की रौशनी और में बेहद ही खूबसूरत लगता है। इस पार्क का निर्माण उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहनजी मायावती द्वारा वर्ष 2008 में कराया दलितों के मसीहा माने जाने वाले सभी महापुरूषों को सम्मान देते हुए कराया। दलित समुदाय भी इसे अपने उत्थान का प्रतीक मानता है। लोगों का कहना है 'कम से कम मायावती जी ने एक ऐसा स्थल बनवा दिया है, जिससे हमें गर्व की अनुभूति होती है। इस पार्क में हर वर्ष 14 अप्रैल को यहां अम्बेडकर जयंती काफी धूमधाम से मनाई जाती है। अगर इस पार्क को लखनऊ की शान कहा जाए तो बिल्कुल भी गलत नहीं होगा।
Published on:
27 Sept 2018 01:21 pm
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