
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. घूसखोर ट्रैफिक कांस्टेबल को तीन साल की कैद और 20 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। 14 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया। विशेष जज संदीप गुप्ता ने कांस्टेबल गंगाराम को स्कूटी का चालान नहीं काटने के बदले में महिला से उसकी अंगूठी लेने के मामले में दोषी पाया। वर्ष 2007 में आकाशवाणी में कार्यरत विभा खरे ने राजधानी के हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी।
कोतवाली में दी एफआईआर में विभा खरे ने बताया कि वह अपनी ड्यूटी समाप्त कर स्कूटी से घर जा रही थीं। डीएएओ चौराहे की जेब्रा क्रासिंग पर ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल गंगाराम ने उनकी गाड़ी रोक ली। विभा से गाड़ी के कागजात मांगे, जो उस वक्त उनके पास नहीं थे। ऐसे में विभा ने कांस्टेबल से चालान काटने को कहा, लेकिन चालान काटने के बजाय कांस्टेबल ने विभा से थाने चलने को कहा।
14 साल बाद सुनाई सजा
कांस्टेबल गंगाराम ने विभा खरे से थोड़ी देर बाद 1000 रुपए मांगे। विभा ने कहा कि उसके पास 100 रुपए ही हैं। ऐसे में गंगाराम की नजर विभा की अंगूठी पर गई और उसने स्कूटी छोड़ने के एवज में अंगूठी मांग ली। विभा को मजबूरन कांस्टेबल को अंगूठी देनी पड़ गई। बाद में विभा खरे ने एसएसपी से इसकी शिकायत की गई। मामले में 14 साल के बाद ट्रैफिक पुलिस वाले को सजा सुनाई गई है।
Published on:
27 Mar 2021 05:54 pm
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