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छलका दर्द-कोख में मत मरोड़ो गला बेटियों को, उडऩे दो उन्हें खुले आसमां में

महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकथाम दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम। महिलाओं और वक्ताओं ने उठाई कन्या भ्रूण हत्या और अत्याचार के खिलाफ आवाज।

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लखनऊ

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raktim tiwari

Nov 24, 2016

violence stop against women

violence stop against women

संयुक्त राष्ट्र संघ के महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकथाम दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में कार्यक्रम हुआ। युवा विकास केंद्र और प्राणिशास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कन्या भ्रूण हत्या और महिला अत्याचार रोकने की जरुरत बताई।

चिकित्सा एवं परिवार कल्याण के रामलाल चौधरी ने कहा कि महिलाएं और बटियां देश की शान हैं। बेटियां बोझ नहीं बल्कि परिवार के लिए सौभाग्य हैं। बेटियों का कोख में कत्ल मानवता को शर्मसार करने वाला कदम है।

इस दौरान उन्होंने पीसीपीएनडीटी एक्ट, सोनोग्राफी मशीन, एक्टिव ट्रेकर, इम्पेक्ट सॉफ्टवेयर, टोल फ्री नंबर की जानकारी दी।

उपाचार्य डॉ. अशोक केवलरमानी ने कहा कि महिलाएं त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति हैं। वह भारतीय संस्कृित की रक्षक और नींव है।

डॉ. भारती प्रकाश ने कहा कि महिला सृष्टि का रूप है। गर्भ में कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं से छेड़छाड़ जैसे घृणित कृत्य रोकने की जरूरत है।

नारी के अस्तित्व के साथ मानव जीवन जुड़ा है। वह नीति नियामक और नीति पालक है। संचालन चंदा केसवानी ने किया।

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