
symbolic Image of BJP worker before nikay chunav
उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपना आक्रामक रुख साफ कर दिया है कि, चुनाव विधानसभा हो, लोकसभा हो या फिर आगामी निकाय चुनाव वो हर बार उतनी ही मेहनत से काम करती है। चुनावी मैराथन में इसी वजह से वो सबसे आगे रहती है। राज्य मुख्यालय पर ये बैठक अलग अलग पदाधिकारियों के हिसाब से अलग अलग समय पर आयोजित होगी। अवध, ब्रिज, काशी, गोरखपुर, पश्चिम और कानपुर क्षेत्रों के पदाधिकारियों को बैठक में प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह इस बैठक में प्रमुख तौर पर मंथन करेंगे।
Yogi सरकार के हर मंत्री को एक जिले की ज़िम्मेदारी
भाजपा अपने सभी 6 क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों से वार्ता करेगी। जिन्हें निकाय चुनाव की ज़िम्मेदारी दी जानी है। उसके बाद जिला स्तर पदाधिकारियों से बैठक होगी जो निकाय चुनावों को जिले में देख रहे हैं। साथ ही ऐसे अलग अलग क्षेत्रों के प्रभारियों से भी बातचीत की जाएगी जो संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। इसी क्रम में भाजपा सरकार की ओर से पहले ही मंत्रियों को उनके जिले की ज़िम्मेदारी दी जा चुकी है। हर मंत्री को अपने जिले में पार्टी के इन कार्यों को प्राथमिकता से करने को कहा गया है।
यूपी के नगर निगम, नगर पालिकाओं में इस बार 90 प्रतिशत सीट जीतने का लक्ष्य लेकर पार्टी आगे बढ़ने के मूड में है। इसी की तैयारी भी कराई जा रही है। क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि, उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव नवंबर से दिसंबर महीने तक पूर्ण रूप से घोषित हो जाएंगे। जिसमें नगर निगम, महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष के अलावा लगभग 2 हज़ार से अधिक वार्डों में पार्षदों का चुनाव होगा। इसमें टिकट बांटने के फार्मूले पर जो चर्चा होनी है उसमें क्षेत्रीय प्रभारी, पार्टी पदाधिकारी, जातिगत समीकरण पर भी मंथन होगा।
एक तरफ जहां दूसरी पार्टियां निकाय चुनावों के बारे में सोच भी नहीं पाई हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने रणनीति बनाने से लेकर प्रत्याशियों के चयन तक की बैठकें शुरू कर दी हैं। ऐसे में परिणाम को अपने पक्ष में कैसे किया जाता है ये भाजपा की इसी प्रकार की बैठकों और रणनीतियों में साफ देखा जा सकता है।
Updated on:
08 Oct 2022 11:09 am
Published on:
08 Oct 2022 11:02 am

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