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यूपी में निजी इंजीनियरिंग कालेज बंद करने की राह आसान

अन्य संस्थानों में समायोजित किये जाएंगे विद्यार्थी, प्रक्रिया निर्धारित

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Sanjeev Mishra

Jan 03, 2017

लखनऊ.
प्रदेश में चल रहे निजी इंजीनियरिंग कालेजों को पूरी तरह बंद करने की राह प्रदेश सरकार ने आसान कर दी है। अब उनमें पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को अन्य संस्थानों में समायोजित भी किया जा सकेगा। इस संबंध में प्राविधिक शिक्षा विभाग ने पूरी प्रक्रिया निर्धारित करने के साथ इस बाबत शासनादेश भी जारी कर दिया है।


प्राविधिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग ने बताया कि कोई भी निजी इंजीनियरिंग कालेज मौजूदा पाठ्यक्रमों की असम्बद्धता या समापन चाहता है, तो उसे प्राविधिक विश्वविद्यालय के समक्ष आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए गुण-दोष का परीक्षण कर राज्य सरकार की स्वीकृति से पाठ्यक्रमों की समाप्ति के लिए अनुमति प्रदान करेगा। इसके लिए एआईसीटीई के नियमों को आधार बनाते हुए संबंधित कालेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अन्य संस्थानों में समायोजित किया जाएगा। ऐसे प्रकरणों में पारदर्शिता एवं एकरूपता के उद्देश्य से प्राविधिक शिक्षा विभाग द्वारा नीति निर्धारित की गई है ताकि छात्रों के हित का पूर्ण ध्यान रखा जाए और प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।


31 जनवरी तक आवेदन

प्रमुख सचिव ने बताया कि सत्र 2017-18 में संस्थान को पूर्ण रूप से बन्द करने की इच्छुक संस्था को 31 जनवरी, 2017 तक आवेदन करना होगा। आवेदन पर शासन एवं विश्वविद्यालय की अनापत्ति के उपरान्त पूर्ण बन्दी की अनुमति प्राप्त करनी होगी। संस्था को अपने आवेदन में संस्था एवं छात्रों का पूर्ण विवरण देना होगा। इसमें ब्रान्चवार प्रवेशित छात्रों की संस्था (छात्रों की श्रेणी एवं छात्रवृत्ति सहित), छात्रों की वार्षिक ट्यूशन फीस एवं अन्य लिया जाने वाला शुल्क आदि, शैक्षिक एवं शिक्षणेत्तर स्टाफ की देनदारियां, संस्था के विरूद्ध लम्बित कोर्ट केसेज आदि का विवरण शामिल होगा।


अॉनलाइन आवेदन

इंजीनयरिंग कालेज बंद करने के लिए अॉनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यासय (एकेटीयू) ने इसके लिए प्रारूप निर्धारित कर दिया है, जिस पर आनलाइन आवेदन कर हार्डकापी शासन में प्राविधिक शिक्षा विभाग में जमा होगी। आवेदक संस्था द्वारा अपने आवेदन-पत्र के साथ उन संस्थाओं की सूची उपलब्ध करायी जायेगी जो उसके छात्रों को समायोजित करने की इच्छुक हों। आवेदक संस्था द्वारा ही इन स्वीकर्ता संस्थाओं से सूचना प्राप्त करके ब्रान्चवार एवं वर्षवार रिक्त सीटें, ट्यूशन फीस, अन्य शुल्क तथा गत तीन वर्षो के प्रवेशित छात्रों की संख्या एवं छात्रों के उत्तीर्ण होने के प्रतिशत का विवरण उपलब्ध कराया जायेगा।


28 फरवरी तक टिप्पणी

आवेदन प्राप्त होने पर विश्वविद्यालय 28 फरवरी तक आवेदन पत्र में उल्लिखित सूचनाओं की यथार्थता पर अपनी टिप्पणी शासन को उपलब्ध कराएगा। यदि उक्त नियत समय तक विश्वविद्यालय द्वारा टिप्पणी शासन को उपलब्ध नहीं करायी जाती, तो आवेदक संस्था द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना पर विश्वविद्यालय की सहमति मानते हुए शासन काउन्सिलिंग के लिए निर्देश जारी करेगा। छात्रों के समायोजन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एवं छात्रों के हित में उक्त स्वीकर्ता संस्थाओं के साथ-साथ विश्वविद्यालय द्वारा समायोजन की इच्छुक अन्य संस्थाओं को भी चिन्हित किया जाएगा। ऐसी सभी संस्थाओं की सूची पूर्ण विवरण सहित विश्वविद्यालय 28 फरवरी तक अपनी बेवसाइट पर प्रदर्शित करेगा, जिससे छात्र अपनी च्वाइस के अनुसार संस्थाओं का चयन कर सकें।


काउंसिलिंग से आवंटन

ऐसे छात्रों की काउन्सिलिंग के लिए विश्वविद्यालय 28 फरवरी तक एक कमेटी का गठन करेगा, जिसके द्वारा आनलाइन काउन्सिलिंग सुनिश्चित करायी जायेगी। छात्रों द्वारा 15 मार्च तक अपने वरीयता क्रम में संस्थाओं की च्वाइस दी जायेगी। छात्रों की मेरिट के अनुसार काउंसिलिंग कर के संस्थानों का चयन कराया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल तक पूर्ण कर ली जाएगी। समायोजन किये जाने वाले समस्त छात्रों की ट्यूशन फीस/अन्य शुल्क का अन्तर आवेदक संस्थान अथवा स्वीकर्ता संस्थान द्वारा वहन किया जायेगा। इस आशय की सुस्पष्ट अण्डर टेकिंग संबंधित स्वीकर्ता संस्थान देगा जिसमें छात्रवार धनराशि का तथा उसके द्वारा शेष वर्षों में देय शुल्क का विवरण अंकित किया जायेगा।


पांच वर्ष न खोल सकेंगे

संस्था की पूर्ण बन्दी के आवेदन पर शासन का निर्णय 30 अप्रैल तक संस्था एवं विश्वविद्यालय को बता दिया जाएगा। इसके बाद 15 मई तक संस्था की असंबद्धता की कार्यवाही पूर्ण कर ली जायेगी। जिस संस्थान को बंद करते हुए छात्र समायोजित किये जा रहे हैं, उस संस्थान को पांच वर्ष तक पुनः प्रारम्भ करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। प्रोग्रेसिव क्लोजर की स्थिति में छात्रों का समायोजन आवश्यक नहीं होगा तथा बंद किये जा रहे संस्थानों में ही उनका पाठ्यक्रम पूर्ण कराया जायेगा।

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