
शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड को योगी सरकार का तगड़ा झटका, लिया यह बड़ा फैसला
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) ने शिया और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Shia Sunni Waqf Board) की संपत्तियों में अनियमितताओं की जांच आखिरकार सीबीआई (CBI) से कराने का फैसला किया है। गृह विभाग ने प्रयागराज और लखनऊ में दर्ज दो मुकदमों के साथ ही यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Shia Central Waqf Board) और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (UP Sunni Central Waqf Board) द्वारा अनियमित रूप से खरीदी-बेची गईं और ट्रांसफर की गई संपत्तियों की सीबीआई जांच (CBI Investigation) कराने संबंधी पत्र केंद्र सरकार को भेजा है।
योगी सरकार ने केंद्र से की सिफारिश
दरअसल 2017 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार (BJP Government) बनी थी तो उस समय शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड (Shia and Sunni Waqf Board) पर घोटाले का आरोप लगाकर सीबीआई जांच (CBI Investigation) कराने की घोषणा हुई थी, लेकिन सरकार सीबीआई जांच के लिए जरूरी औपचारिकताएं ही पूरी नहीं कर सकी थी। ढाई साल बाद अब सरकार ने सीबीआई जांच कराने के लिए कागजी औपचारिकताएं पूरी कर केंद्र सरकार (Central Government) को सिफारिश भेज दी है। दरअसल शनिवार को ही यहां के नदवा कॉलेज में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (Muslim Personal Law Board) की बैठक हुई थी। इससे पहले ही प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहसीन रजा (Mohsin Raza) ने आरोप लगाया था कि कुछ प्राइवेट संगठन मुसलमानों को गुमराह करने में जुटे हुए हैं।
हजरतगंज कोतवाली (Hazratganj Kotwali) में मुकदमा दर्ज
प्रदेश की योगी सरकार ने शिया-सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में अनियमितता की सीबीआई जांच (CBI Investigation) की सिफारिश में जिन दो मुकदमों का जिक्र किया है, उनमें शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी आरोपित हैं। लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में 27 मार्च 2017 को कानपुर देहात निवासी तौसीफुल हसन की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी, प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैय्यदैन रिजवी, निरीक्षक वकार रजा के अलावा कानपुर निवासी नरेश कृष्ण सोमानी व विजय कृष्ण सोमानी नामजद आरोपित हैं।
संपत्ति को हड़पने का आरोप
तौसीफुल ने तहरीर में कहा है कि कानपुर के स्वरूप नगर में उनकी मां के नाम संपत्ति है, जिसके वह मुतव्वली हैं। आरोप है कि स्वरूप नगर निवासी नरेश कृष्ण सोमानी और उनके भाई विजय कृष्ण इस संपत्ति को हड़पना चाहते हैं। वसीम रिजवी और अन्य आरोपितों ने सांठगाठ कर करीब 27 लाख रुपये का लेनदेन किया गया और 29 मई 2009 को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर उनकी मां के नाम दर्ज संपत्ति का वक्फ रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया और पत्रावली से महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब कर दिये। विरोध पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं। हजरतगंज पुलिस (Hazratganj Police) ने धोखाधड़ी व जान से मारने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी।
वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) के खिलाफ एफआईआर
दूसरी ओर इस मुकदमे से पहले प्रयागराज कोतवाली में 26 अगस्त, 2016 को सुधांक मिश्रा की ओर से वसीम रिजवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि शिया वक्फ बोर्ड (Shia Waqf Board) के अध्यक्ष वसीम द्वारा प्रयागराज के पुरानी जीटी रोड स्थित मकान नंबर 61/56 इमामबाड़ा गुलाम हैदर पर अवैध ढंग से दुकानों का निर्माण शुरू किया गया। क्षेत्रीय अवर अभियंता व संयुक्त सचिव द्वारा अवैध निर्माण को रोकने के संबंध में कार्रवाई के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया। आरोप है कि सात मई 2016 को निर्माण को सील बंद कराया गया लेकिन उसके बाद भी निर्माण जारी रहा। बाद में सील बंदी को तोड़कर अनाधिकृत रूप से निर्माण कार्य कराये जाने की एफआइआर दर्ज की गई। राज्य सरकार (State Government) ने इन दोनों मुकदमों की भी सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की है।
सीबीआई जांच की सिफारिश
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी (Awanish Kumar Awasthi) के मुताबिक सचिव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय तथा निदेशक सीबीआइ को पत्र भेजकर शिया-सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में अनियमिता की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है।
Updated on:
13 Oct 2019 01:53 pm
Published on:
13 Oct 2019 01:50 pm

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