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यूपी में बनें नए पर्यटन सर्किट: कृष्ण, जैन और सूफी पर्यटन की तरफ भी ध्यान दे सरकार

यूपी में बनें नए पर्यटन सर्किट- कृष्ण, जैन और सूफी पर्यटन की तरफ भी ध्यान दे सरकार

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लखनऊ. देश में सबसे ज्यादा आबादी वाला प्रदेश है यूपी। यहां हर साल हजारों पर्यटक आते हैं। राम, कृष्ण, बुद्ध और भगवान महावीर स्वामी की जन्मस्थली यूपी है। लेकिन, राम और बुद्ध सर्किट के अलावा अन्य पर्यटन स्थलों की तरफ पिछली सरकारों ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। इसकी वजह से यूपी के पर्यटन स्थलों का जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हुआ। पर्यटन विभाग की मानें तो उत्तर प्रदेश देश का दूसरा ऐसा पर्यटन स्थल है जहां सबसे ज्यादा घरेलू पर्यटक आते हैं। जबकि, विदेशी पर्यटकों के मामले में यूपी का तीसरा स्थान हैं। यदि उप्र के अन्य पर्यटक स्थलों का समुचित विकास हो जाए तो प्रदेश में पर्यटकों की न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि रोजगार की नयी संभावनाएं भी पैदा होगीं।

कम से कम नौ सर्किट बनें यूपी में

जानकारों का मानना है कि यूपी में पर्यटन का समुचित दोहन करना है तो यूपी में कम से कम नौ और टूरिस्ट सर्किट बनने चाहिए। राम सर्किट के अलावा कृष्ण, जैन, सूफी और मुस्लिमों से जुड़े धार्मिक स्थलों के अन्य टूरिस्ट सर्किट बनना चाहिए।

इस तरह विकसित हो सकता है नया स्थल

पर्यटन के विकास के लिए महाभारत सर्किट में मेरठ में हस्तिनापुर को, फर्रुखाबाद में कम्पिल और अहिच्छत्र को जोड़ा जा सकता है। बरेली में आवंला तहसील में उत्तरी पांचाल की प्राचीन राजधानी को पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है। कृष्ण सर्किट के लिए मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना और नंदगांव को विकसित किया जा सकता है। जैन सर्किट में मेरठ, आगरा , कौशांबी, वाराणसी, देवरिया, अयोध्या, श्रावस्ती और फर्रुखाबाद को शामिल किया जा सकता है। जबकि सूफी सर्किट में फतेहपुर सीकरी, रामपुर, बदायूं, बरेली, लखनऊ, काकोरी, देवा शरीफ , बहराइच, इलाहाबाद, किछौछा शरीफ, सैयद कदक शाह दरगाह, कांतित शरीफ दरगाह को मिलाया जा सकता है। इसके अलावा वॉटर स्पोट्र्स सर्किट में गोरखपुर के रामगढ़ ताल, पीलीभीत के चूका, ललितपुर के माता टीला और झांसी के राजगढ़ और विंध्य क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा कंवर सर्किट बन सकता है। इसमें बागपत, गाजियाबाद, गोंडा, लखीमपुर खीरी, कालिंजर को जोड़ा जा सकता है।

शक्ति सर्किट भी बनें

देवियों के नाम पर प्रदेश में अनेक बड़े मंदिर हैं। इनमें विंध्याचल, बलरामपुर, वाराणसी, कौशांबी, इलाहाबाद, सोनभद्र और सहारनपुर जैसे जिले शामिल हैं। इन्हें शक्तिपीठ सर्किट से जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा यूपी स्वतंत्रता संग्राम का गढ़ रहा है। इसके लिए कानपुर के बिठूर, लखनऊ के काकोरी और प्रदेश के अन्य इलाकों को स्वतंत्रता संग्राम सर्किट से जोड़ा जा सकता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो

लखनऊ यूनिवर्सिटी में इंस्टिट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज के निदेशक प्रो. एमके अग्रवाल के मुताबिक यूपी में पर्यटन को लेकर ज्यादा फोकस नहीं किया गया। इसके कई राजनीतिक कारण हो सकते हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि सरकारें इस तरफ ध्यान दें। खुशी है नयी सरकार पर्यटन पर ध्यान दे रही है। धार्मिक पर्यटन भी इसमें अहम है। लेकिन अभी कई टूरिस्ट स्पॉट्स के आस-पास इंफ्रांस्ट्रक्चर ही डेवलप नहीं है। छोटे-छोटे टूरिस्ट स्पॉट्स को भी सर्किट से जोडऩा चाहिए। नैमिषारण्य जैसे तमाम ऐसे पर्यटन स्थल हैं जहां विकास की संभावनाएं हैं।

जरूरत है ब्रांडिंग की

इंस्टिट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज के एसिस्टेंट प्रोफेसर सुयश यादव का कहना है कि यूपी में पर्यटन का काफी स्कोप है। बस जरूरत है उसकी ब्रांडिंग की। आगरा, वाराणसी के अलावा कई अन्य टूरिस्ट स्पॉट हैं जिन्हें बढ़ावा मिलना चाहिए। उनकी ज्यादा से ज्यादा ब्रांडिंग होनी चाहिए। मध्य प्रदेश औऱ गुजरात टूरिज्म से सीख लेने चाहिए।

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